
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का रास्ता तैयार हो रहा है। राज्य शासन ने व्यवस्था के संचालन के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अनुसार पहले इस सेवा के लिए पोर्टल बनाया जाएगा , फिर विभागों के एचओडी की अनुशंसा से ई-हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे। इसी कार्ड के सहारे कैशलेस इलाज की व्यवस्था आगे बढ़ेगी।
27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के शासकीय सेवकों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण, सुगम और बिना किसी आर्थिक बाधा के स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इस निशुल्क और कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के अंतर्गत आने वाले पात्र शासकीय सेवकों और उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को मिलेगा। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों में ई-हेल्थ कार्ड दिखाना अनिवार्य किया गया है।
कर्मचारियों की पात्रता का सत्यापन उनकी कर्मचारी आईडी के माध्यम से किया जाएगा, जबकि आश्रित परिवार के सदस्यों का सत्यापन अन्य जरूरी पहचान दस्तावेजों के आधार पर संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से एक विशेष लाभार्थी पहचान प्रणाली विकसित की जा रही है।
योजना के तहत इलाज की अधिकतम सीमा केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना यानी सीजीएचएस के बी-1 श्रेणी के शहरों के लिए निर्धारित पैकेज दरों या वास्तविक खर्च, जो भी कम हो, उसके आधार पर तय की जाएगी। यदि निर्धारित सीमा से अधिक खर्च होता है, तो उसकी भरपाई कर्मचारी को स्वयं करनी होगी। यह पूरी व्यवस्था अस्पताल में भर्ती होकर कराए जाने वाले उपचार पर लागू होगी, जबकि ओपीडी सेवाएं पूर्ववत चिकित्सा प्रतिपूर्ति नियमों के अंतर्गत ही मिलती रहेंगी।
योजना के सुचारू संचालन के लिए आयुष्मान भारत के आईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जिसके माध्यम से अस्पतालों के पंजीयन, इलाज की पूर्व अनुमति और भुगतान की प्रक्रिया संचालित होगी। लाभार्थियों और सूचीबद्ध अस्पतालों की किसी भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए 24 घंटे चलने वाला टोल-फ्री कॉल सेंटर और ऑनलाइन पोर्टल स्थापित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग इस संपूर्ण योजना का नोडल विभाग रहेगा और संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के अधीन एक समर्पित सेल गठित किया गया है। अस्पतालों में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है।