
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक चुस्त, संवेदनशील और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अब 'आईगाट कर्मयोगी' पोर्टल पर प्रतिमाह कम से कम एक ऑनलाइन कोर्स पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
शासन ने इस सतत प्रशिक्षण को सीधे अधिकारियों-कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) के मूल्यांकन से जोड़ दिया है, जिससे लापरवाही बरतने पर कर्मचारियों की पदोन्नति और सेवा रिकॉर्ड पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, नवंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को न्यूनतम पांच पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरे करने होंगे। प्रत्येक कोर्स की समयसीमा कम से कम एक घंटे निर्धारित की गई है। राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (मिशन कर्मयोगी) के अंतर्गत यह कदम कर्मचारियों की कार्यक्षमता, जनसेवा के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत आईगाट पोर्टल पर अर्जित किए गए क्रेडिट, पूर्ण किए गए पाठ्यक्रम और सभी प्रशिक्षण गतिविधियों का ब्योरा कर्मचारियों की वार्षिक कार्य प्रदर्शन आकलन रिपोर्ट यानी स्पैरो पोर्टल से सीधे लिंक किया जा रहा है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी समय पर अपना निर्धारित प्रशिक्षण पूरा नहीं करता है, तो उसका प्रतिकूल प्रभाव उसकी एसीआर रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज होगा। इस डिजिटल एकीकरण से मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनेगी।
राज्य शासन ने समस्त विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के पद, जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली के अनुरूप उपयुक्त पाठ्यक्रमों का तत्काल चयन कर उन्हें असाइन करें। शासन का मानना है कि निरंतर सीखने की आदत से कर्मचारियों के कौशल में वृद्धि होगी और नागरिकों को दी जाने वाली सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।