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बघेल ने वापस ली थी सीबीआई से सामान्य सहमति, साय सरकार के 34 महीनों में सात मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसी को

छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार द्वारा सामान्य सहमति बहाल किए जाने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की सक्रियता बढ़ी है। पिछले ढाई वर्षों में सीज...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 07:35:49 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 07:38:06 PM (IST)
बघेल ने वापस ली थी सीबीआई से सामान्य सहमति, साय सरकार के 34 महीनों में सात मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसी को
विष्णु देव सरकार की ओर से सीबीआई को सौंपी गई जांच से संबंधित प्रतीकात्मक तस्वीर। - एआई

HighLights

  1. साय सरकार ने जांच की सामान्य सहमति बहाल की
  2. ढाई साल में सात बड़े मामले सौंपे गए एजेंसी को
  3. सीजीपीएससी भर्ती और बीएसपी में चोरी की जांच

राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। राज्य में विष्णु देव साय सरकार के गठन के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच का दायरा बढ़ा है। वर्ष 2019 में तात्कालीन भूपेश सरकार ने सीबीआई को मिली जनरल कंसेंट यानी सामान्य सहमति वापस ले ली थी। सत्ता में आने के बाद साय सरकार ने वर्ष 2024 में सीबीआइ के लिए सामान्य सहमति बहाल कर दी थी। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी के लिए राज्य में नए मामलों की जांच शुरू करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हुई।

पिछले करीब ढाई वर्षों में सात महत्वपूर्ण मामलों की जांच सीबीआइ को सौंपी गई है। इनमें सीजीपीएससी भर्ती घोटाला, महादेव आनलाइन सट्टा, दिव्यांग कल्याण फंड में गड़बड़ी,बिलासपुर में पुलिस हिरासत में मौत,भिलाई इस्पात संयंत्र में स्क्रैप चोरी,कोरिया तिहरा हत्याकांड और बीरनपुर हिंसा शामिल हैं।


जनवरी 2019 में बघेल सरकार ने वापस ली थी सहमति

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जनवरी 2019 में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की धारा-6 के तहत सीबीआइ को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी। इसके बाद राज्य में किसी नए मामले की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी को सरकार से अलग से अनुमति लेनी पड़ती थी। वर्ष 2024 में साय सरकार ने सामान्य सहमति बहाल की। इसके बाद राज्य से जुड़े मामलों में सीबीआइ की एंट्री का रास्ता सुगम हुआ।

इन मामलों में कर रही जांच

सीजीपीएससी भर्ती परीक्षा-2021-22 घोटाले की अनियमितताओं के साथ ही महादेव सट्टेबाजी नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल एजेंसी के दायरे में है। बीरनपुर हिंसा और हत्या, दिव्यांग कल्याण फंड में गड़बड़ी, बिलासपुर में पुलिस हिरासत में मौत जैसे मामलों की जांच भी सीबीआइ कर चुकी है। वर्तमान में भिलाई इस्पात संयंत्र से लोहा और स्क्रैप चोरी,महादेव सट्टा, कोरिया तिहरे हत्याकांड की जांच भी केंद्रीय एजेंसी कर रही है।

चर्चित मामलों की भी हो चुकी है जांच

राज्य गठन के बाद से समय-समय पर कई बड़े मामलों की जांच सीबीआइ करती रही है। इनमें अजीत जोगी शासनकाल में वर्ष 2003 में राकांपा के कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी हत्याकांड बहुचर्चित राजनीतिक हत्याकांड के साथ हूी वर्ष 2011 में गरियाबंद के पत्रकार उमेश राजपूत और दिसंबर 2010 में बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड, वर्ष 2017 में अश्लील सीडी कांड समेत कई हाईप्रोफाइल मामलों की जांच शामिल है।