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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बस्तर, दंतेवाड़ा, सूरजपुर, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार में एक अप्रैल से महिलाओं के हाथ होगा रेडी टू ईट फूड

एक अप्रैल से छह जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सूरजपुर, कोरबा, रायगढ़ और बलौदबाजार की महिला स्व-सहायता समूह जिम्मेदारी संभाल लेंगे। पहले चरण में छह जिलों को ...और पढ़ें

By Shashank Shekhar BajpaiEdited By: Shashank Shekhar Bajpai
Publish Date: Thu, 23 Jan 2025 11:39:49 AM (IST)Updated Date: Thu, 23 Jan 2025 11:39:49 AM (IST)
बस्तर, दंतेवाड़ा, सूरजपुर, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार में एक अप्रैल से महिलाओं के हाथ होगा रेडी टू ईट फूड
रेडी टू ईट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार व्यवस्था की जानी है।

HighLights

  1. 2009 से छत्तीसगढ़ में चल रहा है रेडी टू ईट कार्यक्रम।
  2. 4 टीमों ने आठ राज्यों में जाकर किया इसका अध्ययन।
  3. 20 नवंबर 2022 को भूपेश सरकार ने निजी कंपनी को सौंपा।

अभिषेक राय, रायपुर। प्रदेश में पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के अंतर्गत रेडी टू ईट की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक अप्रैल से छह जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सूरजपुर, कोरबा, रायगढ़ और बलौदबाजार की महिला स्व-सहायता समूह जिम्मेदारी संभाल लेंगे।

पहले चरण में छह जिलों को ही शामिल किया गया है। इसके बाद धीरे-धीरे संख्या बढ़ाई जाएगी। महिला व बाल विकास विकास विभाग की सचिव शम्मी आबादी की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि रेडी टू ईट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार व्यवस्था की जानी है। यही कारण है कि सभी जिलों में रेडी टू ईट की जिम्मेदारी समूहों को नहीं दी गई है।

समूहों को दी जाएंगी सुविधाएं

गाइडलाइन के अनुसार, समूहों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बताते चलें कि प्रदेश में वर्ष-2009 से संचालित रेडी टू ईट की जिम्मेदारी पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने 20 नवंबर, 2022 को महिला स्व-सहायता समूह से छीनकर निजी कंपनी को सौंप दी थी।


इससे महिलाओं के स्वजन को मिलाकर करीब तीन लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए थे। भाजपा ने इसका जमकर विरोध किया था। प्रदेश में 1786 महिला स्व सहायता समूह हैं।

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सरकार बनते ही लिया निर्णय

प्रदेश में रेडी टू ईट को स्व सहायता समूहों को देने के मामले को विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मोदी की गारंटी में शामिल किया था। चुनाव के बाद सरकार बनते ही समूहों को सौंपने का निर्णय लिया गया।

राज्य सरकार के निर्देश पर विभाग की ओर से दूसरे राज्यों में संचालन की स्थिति का अध्ययन करने के लिए चार टीमें गठित की गईं। इसमें संचालक, उप संचालक और सहायक संचालक को शामिल किया गया था।

आठ राज्यों में पहुंचीं टीमें

ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड, केरल, उत्तर प्रदेश और गुजरात का अध्ययन करने के लिए चार टीमें पहुंची थीं। टीमों ने अध्ययन के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने दी कुछ महत्वपूर्ण गाइडलाइन

  • रेडी टू ईट फूड का निर्माण मानवस्पर्श रहित, स्वचालित मशीन से होना चाहिए।
  • हाइजीनिक फूड का इस्तेमाल हो। फोर्टिफाइड और फाइन मिक्स होना चाहिए।
  • पोषण आहार की गुणवत्ता जांचने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर बनेगी टीम।
  • आहार में निर्धारित मात्रा में कैलोरी, प्रोटीन, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए, बी12, सी, और डी जैसे पोषक तत्व होने चाहिए।