
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया रायपुर। बि राज्य मे कुल 848 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें से 790 स्थानों पर सुधारात्मक उपाय किए गए हैं। अब रायपुर बिलासपुर के बीच राजमार्ग के किनारे बने अवैध ढाबों और ब्लैक स्पाॅट्स में सुधारात्मक गतिविधियां की जाएंगी। बिलासपुर हाई कोर्ट के कड़े रुख और सख्त आदेशों के बाद छत्तीसगढ़ शासन का परिवहन विभाग हरकत में आ गया है। सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और जनहानि रोकने के उद्देश्य से रायपुर जिले के पांच प्रमुख ब्लैक स्पाट समेत अन्य दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधारात्मक कार्यों को गति दे दी गई है।
बुधवार को मंत्रालय में परिवहन सचिव एस. प्रकाश की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों को तय समय-सीमा में हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान टाटीबंध, भाठागांव, बेमता-भुइंया, सिलतरा ओवरब्रिज, निको गेट और पारागांव-निसदा मोड़ जैसे खतरनाक ब्लैक स्पाट पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की समीक्षा की गई। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों हाई कोर्ट ने व्यस्त मार्गों पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर प्रशासन और एनएचएआई को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत के निर्देशों के अनुरूप अब इन सभी स्थानों पर वैज्ञानिक तरीकों से सुधार कार्य किए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
परिवहन सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़कों के आसपास फैले अनधिकृत अतिक्रमण और अवैध ढाबों को तुरंत हटाया जाए। इसके अलावा, शराब दुकानों के आसपास सुरक्षित और सुगम यातायात व्यवस्था बनाने के भी आदेश दिए गए हैं।
राज्य में कुल 848 ब्लैक स्पाट चिन्हित किए गए थे, जिनमें से एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग द्वारा 790 स्थानों पर अल्पकालिक सुधार किए जा चुके हैं। अब रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर विशेष अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों और कब्जों पर नकेल कसी जाएगी।
दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ब्लैक स्पाट पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी संकेतक बोर्ड और गति नियंत्रण के उपाय किए जा रहे हैं। डिवाइडर की अनधिकृत कटिंग रोकने के साथ-साथ गलत दिशा में वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग करने और अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सभी संबंधित एजेंसियों को कार्यों की प्रगति रिपोर्ट फोटोग्राफ के साथ अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि सड़क सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जा सके।