
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। प्रदेश में कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए भारत सरकार की नवीन 'इम्प्रूव्ड राइस स्कीम' को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस दिशा में बुधवार को न्यू सर्किट हाउस में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने की। इसमें प्रदेशभर के राइस मिलर्स, भारतीय खाद्य निगम और मार्कफेड के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि भारत सरकार आगामी खरीफ वर्ष में इम्प्रूव्ड राइस स्कीम को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है। इसके लिए राज्य की राइस मिलों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तकनीकी रूप से अपग्रेड करना अनिवार्य होगा। उन्होंने मिलर्स को आश्वस्त किया कि उनके व्यावहारिक सुझावों और समस्याओं का परीक्षण कर आवश्यक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। इस नई स्कीम का संबंध फोर्टिफाइड राइस योजना से है।
अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से लागू होने वाली इस योजना के तहत गुणवत्ता मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अंतर्गत 10 प्रतिशत अरवा ब्रोकन चावल एवं पांच प्रतिशत उसना ब्रोकन चावल के कड़े मानक निर्धारित किए गए हैं।
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छत्तीसगढ़ राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल बोथरा, महामंत्री विष्णु बिंदल, कोषाध्यक्ष रमेश अग्रवाल समेत अन्य पदाधिकारियों ने योजना लागू करने से पहले कार्यशाला आयोजित करने के लिए खाद्य सचिव का आभार जताया। मिलर्स ने उन्नत धान किस्मों की खेती को बढ़ावा देने और रैक मूवमेंट तेज करने जैसे सुझाव देते हुए योजना के सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर मार्कफेड के एमडी जितेन्द्र शुक्ला और एफसीआइ के जीएम दीपक शर्मा सहित 60 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।