
राज्य ब्यूरो, रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। राज्य के शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक निगम ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए बड़े बदलावों की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत राज्य के स्कूलों में एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू होने जा रहा है, और मार्च माह में ही सभी होम-बोर्ड परीक्षाएं संपन्न करा ली जाएंगी।
इस बार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव नौवीं और दसवीं कक्षाओं के पाठ्यक्रम में देखने को मिलेगा, जहाँ अब 11वीं और 12वीं की तर्ज पर पूरी तरह से एनसीईआरटी की किताबें लागू की जा रही हैं।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के माध्यम से नए सत्र के लिए कुल 39 नई किताबें तैयार की गई हैं। फिलहाल इस नए प्रयोग की शुरुआत गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों से की गई है। इन किताबों के लागू होने से हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों के विद्यार्थियों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी शिक्षा का लाभ मिलेगा। एससीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार, इन किताबों को नौ अलग-अलग चरणों में बेहद सावधानी के साथ तैयार किया गया है, जिसमें पाठ्यक्रम की समीक्षा, विषय चयन और ले-आउट जैसे सभी तकनीकी पहलू शामिल हैं।
पूर्व में पाठ्यक्रम से स्थानीय पाठ हटाए जाने को लेकर उठे विरोध के बाद राज्य सरकार ने बेहद सकारात्मक रुख अपनाया है। स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्देशों के तहत सामाजिक अध्ययन और सहायक वाचन की किताबों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, भूगोल, लोकजीवन, जनजातीय इतिहास, स्थानीय महापुरुषों, रीति-रिवाजों और ऐतिहासिक स्थलों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में सेवानिवृत्त प्राचार्यों और विषय विशेषज्ञों का अमूल्य मार्गदर्शन लिया गया है, ताकि छात्रों को अपनी मिट्टी से जुड़ी शिक्षा मिल सके।
केवल नौवीं और दसवीं ही नहीं, बल्कि अन्य कक्षाओं में भी चरणबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम में बदलाव किए जा रहे हैं। कक्षा पांचवीं के लिए छह नई किताबें तैयार की गई हैं, जबकि सातवीं और आठवीं कक्षाओं के विभिन्न विषयों में भी नए पाठ्यक्रम जोड़े गए हैं। शिक्षा विभाग का मुख्य लक्ष्य एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र के दौरान ही सभी छात्रों को समय पर नई किताबें उपलब्ध कराना है, ताकि पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए।