रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर सरगुजा तक 36 प्रकार की बोलियां बोली जाती हैं। इन्हीं बोलियों के समावेश से छत्तीसगढ़ी भाषा का उद्भव हुआ है। यह भाषा विनम्रता, प्रेम और अपनेपन का एहसास कराती है। बाहर से आने वाला हर व्यक्ति यहां की भाषा में रम जाता है। राज्य निर्माण के बाद तत्कालीन सरकार ने 2007 में आज ही के दिन छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया था। उसके बाद छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध और विकसित करने के लिए 2008 में छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग का गठन किया था। इसके पहले सचिव पद्मश्री सुरेंद्र दुबे थे, जिनके कार्यकाल में अनेक साहित्यकारों की करीब 1200 पुस्तकें छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित हुई हैं।
छत्तीसगढ़ी भाषा में कविता पाठ करने वाले प्रख्यात कवि पद्मश्री सुरेंद्र दुबे बताते हैं कि भरथरी, हल्बी, गोंड़ी समेत करीब 36 बोलियां हैं, जो एक होकर छत्तीसगढ़ी भाषा बनाती हैं। इसका उद्भव बहुत पुराना है। इसका व्याकरण हीरालाल काव्योपाध्याय ने तैयार किया था, जो हिंदी के व्याकरण से भी पुराना माना जाता है। इसके अलावा बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा में एक शिलालेख है, जो छत्तीसगढ़ी भाषा में है। इसे 1700 ईस्वी का बताया जाता है।
शिव महापुराण, उपनिषद का छत्तीसगढ़ी अनुवाद
छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए अनेक साहित्यकारों द्वारा छत्तीसगढ़ी में रचनाएं की जा रही हैं। इसी में से एक रायपुर के साहित्यकार गीता शर्मा ने शिव महापुराण के 24 हजार श्लोक और नौ उपनिषद को छत्तीसगढ़ी भाषा में अनुवाद किया है, जो राजभाषा आयोग की ओर से प्रकाशित हुआ है। गीता शर्मा बताती हैं कि साहित्यकार श्यामलाल चतुर्वेदी, पवन दीवान, पं. दानेश्वर शर्मा, मुकुंद कौशल, सुधीर शर्मा जैसे अनेक साहित्यकारों ने साहित्य के माध्यम से देश विदेश तक छत्तीसगढ़ी भाषा समृद्ध किया है। साथ ही आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए भी लगातार मांग करते आए हैं। गीता कहती हैं कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अलावा राज्य के अब तक के सभी राज्यपालों को शिव महापुराण और उपनिषदों के हिंदी अनुवाद भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर चुके हैं।
बृजमोहन ने प्रस्तुत किया था विधेयक
पद्मश्री दुबे बताते हैं कि छत्तीसगढ़ी भाषा का दर्जा पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के कार्यकाल में मिला। वहीं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में आयोग के लिए विधेयक प्रस्तुत किया था। आयोग बनने के बाद लगातार छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं सूची में शामिल करने के लिए पूर्ववर्ती सरकार समेत वर्तमान सरकार ने केंद्र से मांग की है, लेकिन अब तक आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा सका। वहीं आयोग ने भी छत्तीसगढ़ी आठवीं अनुसूची में क्यों... शीर्षक पर पुस्तक का प्रकाशन भी किया था, जिसे तमाम सांसदों को आयोग ने वितरित किया था।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा ने दिया एकात्मरूप
छत्तीसगढ़ी फिल्म के कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा कहते हैं कि यदि छत्तीसगढ़ी सिनेमा ने छत्तीसगढ़ी भाषा को एकात्मरूप दिया है। छत्तीसगढ़ी सिनेमा आज यूट्यूब या अन्य माध्यम से देश विदेश तक छाया हुआ है, जो हमारी भाषा के प्राचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनुज कहते हैं कि जब छत्तीसगढ़ी भाषा का व्याकरण तैयार हो गया तो है तो अब छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करना चाहिए।