रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अनेक मठ-मंदिरों में आए दिन कोई न कोई पर्व, त्योहार, धार्मिक संस्कार का आयोजन होता है, लेकिन वहां जनसेवा के नाम से कोई खास कार्य नहीं किया जाता। इसके विपरीत राजधानी के वीआइपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर में केवल 20 रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि जरूरतमंदों को सादा एवं स्वादिष्ट भोजन भरपेट कराना है।

तीन साल पहले शुरू हुई राम रसोई, अन्न प्रसादम सेवा

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी बृजलाल गोयल बताते हैं कि पांच साल पहले प्रदेश के भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण किया गया था। उसी दौरान निर्णय लिया गया था कि मंदिर में धार्मिक आयोजनों के अलावा समाजसेवा से संबंधित कार्य किए जाएंगे ताकि प्रदेश के अन्य धार्मिक संस्थान भी प्रेरित हो। इसी उद्देश्य को लेकर अन्न प्रसादम भोजनालय खोला गया ताकि कोई भूखा न रहे। यहां आम से लेकर खास लोग एक साथ बैठकर भोजन कर सकें इसलिए केवल 20 रुपए शुल्क रखा गया है। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। सभी को एक सरीखा भोजन परोसा जाता है।

अनुशासन है प्रमुख नियम

मंदिर में प्रवेश करते ही बाएं तरफ अन्न प्रसादम काउंटर पर 20 रुपए का कूपन देते हैं। इसके बाद लोगों को स्वयं लाइन में लगकर भोजन थाली लेनी पड़ती है। यहां का नियम है कि जूठा नहीं छोड़ना है। जितनी भूख हो उतना ही भोजन थाली में लें। अनुशासन का पालन जरूरी है।

पांच-छह सौ लोग करते हैं भोजन

प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक और शाम 7.30 से रात 10 बजे तक अन्न प्रसादम में पांच-छह सौ लोग भोजन ग्रहण करते हैं।

आलीशान रेस्टारेंट की तरह सुविधा

भोजन हाल में आरामदायक कुर्सियां लगाई गई है, जहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। आलीशान रेस्टारेंट की तरह नजर आने वाले भोजनालय में अमीर-गरीब कोई भी भोजन करने आ सकता है।

तामसिक खाद्य वस्तुओं का उपयोग नहीं

भोजनालय में लहसुन, प्याज का उपयोग नहीं किया जाता। एक सब्जी, रोटी, दाल, चावल और हलवा परोसा जाता है। बाहर से किसी भी चीज को लाने की मनाही है।

मशीन से रोटी

सैकड़ों लोगों के लिए रोटी मशीन से बनाई जाती है। आटे गूंथने, लोई बनाने और सेंकने का कार्य मशीन द्वारा संपन्न होता है, ताकि कुछ ही मिनटों में सैकड़ों रोटी बन सके।

जन्मदिन की पार्टी

श्रीराम मंदिर के पुजारी हनुमतलाल बताते हैं कि बच्चे का जन्मदिन मनाने के लिए कई माता-पिता मंदिर में विशेष पूजा करके महाआरती में शामिल होते हैं। बच्चों की जन्मदिन की पार्टी अन्न प्रसादम भोजनालय में देते हैं। इसके लिए पहले से सूचना देनी होती है। उनकी व्यवस्था अलग से की जाती है। बच्चों को भोजन में पूड़ी, मिठाई परोसी जाती है। बच्चे सेवाभावना करने के लिए प्रेरित हों, इसके लिए मंत्रोच्चार करवाया जाता है।

गोशाला-छात्रावास

मंदिर में गोशाला का संचालन हो रहा है। आदिवासी बच्चों के लिए छात्रावास तथा संस्कृत अध्ययन की निश्शुल्क सेवा दी जाती है।

Posted By: Kadir Khan

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