
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर : राज्य के 17 नगरीय निकायों में चुनावी सरगर्मी तेज है। कांग्रेस में मेयर पद के दावेदारों की लोकप्रियता और जीत की संभावना के साथ उनकी आर्थिक क्षमता भी टिकट का आधार बनती दिख रही है। पार्टी रणनीतिकारों का आकलन है कि भिलाई, बीरगांव, रिसाली और भिलाई-चरौदा नगर निगमों में मेयर चुनाव लड़ने पर कम से कम दो करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर दावेदारों के लिए टिकट पाना आसान नहीं होगा।
भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। चारों निगमों में मेयर पद के संभावित प्रत्याशी सक्रिय हैं। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अभी नहीं हुई है। माना जा रहा है कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद एक-दो दिसंबर को तारीखों का ऐलान हो सकता है।
कांग्रेस के भीतर दावेदारों की लोकप्रियता और जीतने की संभावनाओं के साथ उनकी जेब का हिसाब भी लगाया जा रहा है। पार्टी के नेताओं को प्रदेश में अपने पक्ष में अनुकूल माहौल नजर आ रहा है, लेकिन वे दावेदारों को साफ संकेत दे रहे हैं कि संगठन बहुत ज्यादा आर्थिक मदद करने की स्थिति में नहीं है। चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों को अपने खर्च की व्यवस्था खुद करनी होगी।
चर्चा है कि रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने जितना खर्च करने का भरोसा दिया था, वास्तविक खर्च उससे काफी कम रहा। इसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ा और हार का अंतर बड़ा रहा। यही वजह है कि निकाय चुनाव में कांग्रेस जीतने योग्य चेहरे के साथ उसकी आर्थिक क्षमता को भी अहमियत दे रही है।
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