190 करोड़ की दवा खरीदी, सवालों के घेरे में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन का फैसला, रिकार्ड में कंपनी के बैच, जवाब में किया इनकार
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन (सीजीएमएससी) की करीब 190 करोड़ रुपये की दवा खरीदी में अमानक घोषित पैरासिटामोल के चार बैचों पर शुरू हुई कार्रवाई स...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 01 Aug 2026 02:24:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 01 Aug 2026 02:28:37 PM (IST)
HighLights
- प्रस्तावित दंडात्मक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई
- विरोधाभास में घिरा कंपनी का जवाब
- विवादित बैचों को बदलकर दोबारा आपूर्ति
जितेंद्र सिंह दहिया, नईदुनिया रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन (सीजीएमएससी) की करीब 190 करोड़ रुपये की दवा खरीदी में अमानक घोषित पैरासिटामोल के चार बैचों पर शुरू हुई कार्रवाई सवालों के घेरे में है। आपूर्तिकर्ता 9एम इंडिया को ब्लैकलिस्ट करने और सुरक्षा निधि (एफडीआर) जब्त करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
कंपनी ने अपने जवाब में एक ओर दवा को पूरी तरह मानक के अनुरूप बताया। वहीं दूसरी ओर उन्हीं विवादित बैचों को बदलकर दोबारा आपूर्ति किए जाने की बात भी स्वीकार की। इतना ही नहीं, बाद में मल्टी विटामिन कैप्सूल, डाइसाइक्लोमाइन टैबलेट और एंटीबायोटिक इंजेक्शन के संदिग्ध बैचों का वितरण भी रोकना पड़ा।
प्रस्तावित दंडात्मक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई
नईदुनिया के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इसके बाद भी सीजीएमएससी ने कंपनी का जवाब स्वीकार कर प्रस्तावित दंडात्मक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। आरोप है कि इसी निर्णय से 9एम इंडिया ब्लैकलिस्टिंग, अनुबंध के तहत लगने वाली पेनाल्टी और पूरी खेप बदलने के वित्तीय दायित्व से बच गई।
जिस अवधि में यह निर्णय लिया गया, तब से सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रीतेश अग्रवाल, जीएम (टेक्निकल) पंकज उपाध्याय और एफएसओ प्रेमेश्वर देवांगन संबंधित प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी हैं। ऐसे में उनके निर्णय और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
विरोधाभास में घिरा कंपनी का जवाब
कंपनी ने नोटिस के जवाब में कहा कि जांच रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं है, क्योंकि उसमें कंपनी का नाम और बैच नंबर स्पष्ट नहीं हैं। दूसरी ओर उसी जवाब में यह भी स्वीकार किया कि शिकायत वाले बैच बदलकर नई दवा भेजी गई। यही सबसे बड़ा विरोधाभास है। यदि दवा गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी तो उसे वापस लेकर दूसरी खेप भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी? विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहलू की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
सीजीएमएससी ने पैरासिटामोल 500 एमजी के जिन बैचों को लेकर 9एम इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, उसमें संबंधित बैच नंबर और निर्माता का स्पष्ट उल्लेख था। सीजीएमएससी की प्रक्रिया के अनुसार परीक्षण के लिए दवाएं अनुबंधित प्रयोगशालाओं को निर्माता का नाम छिपाकर भेजी जाती हैं, ताकि जांच निष्पक्ष रहे।
बावजूद इसके 9एम इंडिया ने अपने लिखित जवाब में दावा किया कि नोटिस में दर्ज बैच उसके द्वारा निर्मित नहीं हैं। जबकि नईदुनिया के पास उपलब्ध दस्तावेज दर्शाते हैं कि बाद में इन्हीं बैचों को 9एम इंडिया ने बदलकर दोबारा आपूर्ति की।
इससे यह सवाल खड़ा होता है कि यदि बैच कंपनी के नहीं थे तो उन्हें बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी, जब सीजीएमएससी के अपने नोटिस और रिकार्ड में निर्माता का नाम तथा बैच नंबर दर्ज थे, तब अधिकारियों ने कंपनी के इस दावे को किस आधार पर स्वीकार किया।
नियम क्या कहते हैं?
सीजीएमएससी की निविदा शर्तों के अनुसार यदि कोई दवा लैब परीक्षण में "नाट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी" घोषित होती है तो संबंधित बैच को 60 दिनों के भीतर पूरी मात्रा में बदलना अनिवार्य है। साथ ही उस बैच पर 20 प्रतिशत तक आर्थिक दंड लगाया जाता है। यदि किसी दवा के तीन बैच अमानक पाए जाते हैं तो संबंधित दवा को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने और कंपनी की एफडीआर जब्त करने का भी प्रविधान है।
प्रकरण मेरी जानकारी में नहीं है। प्रबंधन से इसकी जानकारी ली जाएगी। आखिर इस तरह जवाब को कैसे स्वीकार किया गया है, इसकी जांच कराएंगे।
- दीपक महस्के, अध्यक्ष, सीजीएमएससी
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