
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य में पुलिसकर्मियों और जांच अधिकारियों की कमी से आपराधिक मामलों की विवेचना प्रभावित हो रही है। प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक मामलों की जांच लंबित है। 55 हजार से अधिक स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 42 हजार पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, यानी 13 हजार से अधिक पद खाली हैं।
इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर (एसआई) और एएसआई के 1700 से अधिक पद रिक्त हैं। प्रत्येक जांच अधिकारी पर औसतन 150 से अधिक मामलों का बोझ है। भर्ती घोषणाओं के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विवेचना के साथ कानून-व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा, बंदोबस्त और विभागीय जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।
दस्तावेजों व तकनीकी साक्ष्यों की जांच, गवाहों के बयान, आरोपितों की तलाश और फोरेंसिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा से भी जांच में देरी होती है।
हाई कोर्ट में भी उठ चुका है लंबित मामलों का मुद्दा
पुलिस जांच में देरी को लेकर जनहित याचिका पर जुलाई और अगस्त में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने की बात सामने आई। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से शपथ पत्र भी मांगा था। इसके बावजूद भर्ती और विवेचना में तेजी लाने की दिशा में ठोस प्रगति को लेकर सवाल बने हुए हैं।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर असमंजस
पुलिस विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए 13 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की घोषणाएं की जा चुकी हैं, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया की धीमी रफ्तार से कई सवाल उठ रहे हैं। भर्ती शुरू होने और नियुक्तियां पूरी होने की समय-सीमा साफ नहीं होने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बना हुआ है।
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इसका सीधा असर विवेचना और मामलों के निराकरण पर पड़ रहा है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि सीमित मानव संसाधन के कारण जांच अधिकारियों को हर मामले में पर्याप्त समय देना मुश्किल होता है। दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण, गवाहों के बयान, आरोपितों की तलाश तथा फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार भी कई मामलों में जांच को लंबा खींचता है।
लंबित मामलों की समयबद्ध समीक्षा जरूरी
पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर नए अपराधों की जांच करनी है, वहीं दूसरी ओर पुराने लंबित मामलों का निराकरण भी करना है। इसके लिए जिला स्तर पर मामलों की अवधि के अनुसार समीक्षा, लंबे समय से अटकी विवेचनाओं के कारणों की पहचान और जांच अधिकारियों की उपलब्धता का आकलन जरूरी है। साथ ही रिक्त पदों पर भर्ती की समयबद्ध कार्ययोजना बनाना भी अहम होगा।