
रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस नक्सलियों और अपराधियों की कुंडली (डिजिटल डेटाबेस) बनाने की तैयारी में है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने इसके लिए उपकरणों की खरीदी और एजेंसी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीएचक्यू ने टेंडर जारी कर संबंधित उपकरणों के केवल निर्माताओं से एक अप्रैल तक प्रस्ताव आमंत्रित किया है। अफसरों के अनुसार नक्सली और अपराधियों के रिकार्ड के साथ ही उनके विश्लेषण के लिए भी साफ्टवेयर तैयार किया जाएगा।
पीएचक्यू के वरिष्ठ अफसरों के अनुसार इसे नक्सल एंड क्रिमिनल डेटाबेस एनालिसिस सिस्टम नाम दिया गया है। इसके जरिये राज्य में सक्रिय छोटे से छोटे अपराधियों से लेकर विभिन्न् तरह के गिरोहों और नक्सलियों का भी रिकार्ड रखा जाएगा। सिस्टम में राज्य में होने वाली वारदातों के तौर-तरीके को भी अपलोड किया जाएगा। इससे केस सुझाने के साथ ही अपराधियों की पहचान करने में भी सुविधा होगी।
झीरम हमले के बाद तैयार हुआ था नक्सलियों का रिकार्ड
दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में 2010 में नक्सलियों ने सुरक्षाबल के जवानों पर बड़ा हमला किया था। इस घटना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 76 जवान बलिदान हो गए थे। इस घटना के बाद राज्य पुलिस की विशेष खुफिया शाखा (एसआइबी) ने छत्तीसगढ़ प्रदेश के साथ ही देश और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय नक्सलियों का पूरा डेटाबेस तैयार किया था।
इसमें नक्सलियों की गोरिल्ला आर्मी के साथ शहरी क्षेत्रों में उनके मददगारों की पूरी जानकारी एकत्र की गई थी। इसके आधार पर जंगल से लेकर शहरी क्षेत्रों तक पुलिस ने कई सफल आपरेशनों को अंजाम दिया। सूत्रों के अनुसार तक इस रिकार्ड को कंप्यूटराइज नहीं किया गया था।
सीसीटीएनएस से अलग होगा यह सिस्टम
केंद्र सरकार की क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) से राज्य पुलिस और यहां के लगभग सभी थाने जुड़े हुए हैं। इस साफ्टवेयर के माध्यम से आनलाइन एफआइआर के साथ ही आपराधियों का रिकार्ड संग्रहित करने के साथ ही अन्य कई तरह के रिकार्ड इसमें रखे जाते हैं। पुलिस अफसरों के अनुसार इस गुमशुदा और लावारिसों की पहचान में भी यह साफ्टवेयर कारगर साबित हो रहा है। प्रदेश पुलिस का साफ्टवेयर इससे अलग होगा।