श्रीशंकर शुक्ला. रायपुर (नईदुनिया)। छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रिटायर्ड फौजी युवाओं को सेना और पुलिस में भर्ती के लिए निश्‍शुल्क ट्रेनिंग दे रहे हैं। वर्तमान में उनके पास शहर के एक दर्जन से अधिक कालोनियों के युवा रोजना ट्रेनिंग ले रहे हैं। वर्तमान में करीब 150 बच्चे सेना में शामिल होकर देश सेवा में जुड़ने को तत्पर हैं। रिटायर्ड फौजी पन्ना लाल सिंहा रोजाना दो घंटे इनको ट्रेनिंग देते हैं।

निश्‍शुल्क ट्रेनिंग से युवाओं का हौसला बढ़ रहा हैं। ट्रेनिंग मिलने से राजधानी का एक युवक का पुलिस में चयन हुआ है। रिटायर्ड फौजी का मकसद है जिस तरह पंजाब, हरियाणा में घर-घर युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं ठीक उसी तरह रायपुर के युवा भी सेना में भर्ती होकर प्रदेश का नाम रौशन करें।

पन्नालाल सिंहा ने नईदुनिया को बताया कि वह वर्ष 1987 में सेना में भर्ती हुए थे। इस दौरान वह अलग-अलग कई राज्यों में नौकरी की उसके बाद वर्ष 2005 में कारगिर युद्ध के बाद सेना से सेवानिवृत्त हो गए। सेवा निवृत्त होने के बाद सोचा कि नौजवानों के लिए कुछ करना चाहिए क्योंकि सेना भर्ती के दौरान प्रदेश के बच्चे शारीरिक परीक्षाओं के लिए पूरी तरह फिट नहीं रहते थे। क्योंकि युवकों को नियमित ट्रेनिंग नहीं मिल पाती थी। इसी बात को ध्यान में रखकर रिटायर्ड फौजी ने यह बीड़ा उठाया कि रायपुर शहर और आसपास के नौजवानों को नि:शुल्क ट्रेनिंग दी जाए ताकि ये बच्चे आसानी से शारीरिक परीक्षा पास कर सकें।

सेना भर्ता के सिखाए जा रहे गुर

रिटायर्ड फौजी ने बताया कि 15 अगस्त 2020 में वह कमल विहार में शिफ्ट होने के बाद वह कालोनी के तीन बच्चों के साथ नि: शुल्क प्रशिक्षण शुरू किया गया। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया और वर्तमान में करीब 150 बच्चे रोजना सेना और पुलिस भर्ता का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

यहां प्रशिक्षण ले रहीं डाली ने बताया कि मैं पिछले 7 माह से आ रहीं हूं। यहां लोगों को अच्छी ट्रेनिंग मिल रही है ताकि भविष्य में हम पढ़ाई के बाद पुलिस या आर्मी में आसानी से भर्ती हो सकें। टेनिंग में हाई जंप, रनिंग और फिजिकल फिटनेस से जुड़ी तकनीकि के बारे में बताया जा रहा है, जो आर्मी या पुलिस के जवानों को भर्ती के दौरान दी जाती है।

निश्‍शुल्क दी जा रही ट्रेनिंग

कमल विहार के श्रीराम चौक पर रोजा सुबह 5:30 बजे से ट्रेनिंग शुरू हो जाती है। सबसे पहले हम लोगों की ट्रेनिंग रनिंग से होती है। उसके बाद ऊंची कूद, गोला फेंक कराया जाता है। इसके साथ ही लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट भी ली जाती है। पन्ना लाल के साथ सूबेदार के पद से रिटायर हो चुके डीपी पटेल भी साथ दे रहे हैं। उन्होंने बताया रिटायरमेंट के बाद हमारे कंधे पर बंदूक नहीं है। हमने सोचा कि देश सेवा कैसे की जाए और बंदूक नहीं है तो देश सेवा के और भी कई माध्यम है।

जानिए पन्ना लाल ने कहां-कहां दी सेवाएं

रिटायर्ड फौजी पन्नालाल कहते हैं कि देशभक्ति का जज्बा हर एक में होना चाहिए। वह 1987 में भर्ती हुए थे। वह ओपी रक्षा, पराक्रम और कारगिल युद्ध में भाग लिया उसके बाद 2005 में रिटायर हुए। उनका यह मकसद है कि बच्चों को फ्री में फिजिकल ट्रेनिंग दिया जाए, क्योंकि छत्तीसगढ़ के बच्चे फौज में बहुत कम हैं. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में प्रत्येक घर से फौजी निकलते हैं। इस मकसद से इसे शुरू किया गया है।

Posted By: Kadir Khan

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