भागीदारी से जल संचय के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ देश भर में प्रथम, प्रदेश के इस मॉडल ने रखी उत्कृष्ट प्रदर्शन की नींव
जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 07:55:47 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Sep 2026 07:57:35 PM (IST)
सम्मेलन को संबोधित करते मुख्यमंत्री विष्णु देव साय। - जनसंपर्कHighLights
- छत्तीसगढ़ जल संचय जन भागीदारी अभियान में देश में प्रथम
- किसानों ने खेत का पांच प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण को दिया
- प्रदेश के पांच जिले देश के शीर्ष दस जिलों में हुए शामिल
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। वर्षा जल को सहेजने और भू-जल स्तर को सुधारने की दिशा में छत्तीसगढ़ देश भर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में यह उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के अनूठे मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक सराहा गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साझा किया मॉडल
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक व्यापक जनअभियान का रूप दिया है। वे स्वयं एक किसान परिवार से आते हैं और खेती-किसानी में पानी के वास्तविक महत्व को भली-भांति समझते हैं। यही कारण है कि राज्य में जल संरक्षण योजनाओं के केंद्र में हमेशा किसानों और गांवों को रखा गया है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र चार प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद छत्तीसगढ़ ने इस अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
कोरिया जिले का अनूठा पांच प्रतिशत मॉडल
छत्तीसगढ़ की इस राष्ट्रीय सफलता के पीछे कोरिया जिले से शुरू हुआ ‘5 प्रतिशत मॉडल’ सबसे बड़ा आधार बना है। इस अभिनव पहल के अंतर्गत राज्य के किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। इन हिस्सों में विशेष जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे खेत का बारिश का पानी बाहर बहने के बजाय वहीं रुके और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो जाए। इस मॉडल की खूबी यह है कि इसमें किसान केवल लाभार्थी नहीं बल्कि सक्रिय भागीदार हैं, जिससे उनकी खेती की मानसून पर निर्भरता कम हो रही है।
अभियान के विभिन्न चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन
‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन बेजोड़ रहा है। पहले चरण में 4 लाख 5 हजार से अधिक जल संरचनाएं बनाकर राज्य ने दूसरा स्थान प्राप्त किया था। दूसरे चरण में 24 लाख से अधिक संरचनाओं का पंजीकरण कर राज्य ने अपनी स्थिति मजबूत रखी। अब तीसरे चरण में 79 हजार से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण और सफल पंजीकरण के साथ छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल कर एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।
शीर्ष दस जिलों में छत्तीसगढ़ का दबदबा
राज्य की इस समग्र सफलता में छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। प्रदेश के पांच प्रमुख जिले—सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम—देश के शीर्ष 10 जिलों की सूची में शामिल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन, पंचायतों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से इन जिलों में जल संचयन के अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। इन ठोस प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर मात्र 19 रह गई है।
मुख्यमंत्री के महत्वपूर्ण सुझाव और भविष्य की दिशा
शिखर सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देश भर में जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी साझा किए। उन्होंने प्रत्येक राज्य के लिए अलग ‘कैच द रेन’ प्लान तैयार करने, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने और मुख्य सचिव स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करने का सुझाव दिया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी सत्र के दौरान राज्य के कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इस जनभागीदारी मॉडल से न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और पेयजल सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।