बस्तर में 116 नेताओं की सुरक्षा घटाई, केदार, कवासी, बैज, गागड़ा को अब जेड प्लस की जगह जेड श्रेणी
छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग के 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में कटौती कर दी है जिसमें कई दिग्गज मंत्रियों और नेताओं की सुरक्षा कम की गई है।
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 07:16:01 PM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 07:20:03 PM (IST)
बस्तर सुरक्षा समीक्षा के बाद आए बदलाव की प्रतीकात्मक तस्वीर। -एआईHighLights
- बस्तर संभाग के नेताओं की सुरक्षा श्रेणी घटी
- केदार कश्यप और दीपक बैज की सुरक्षा घटी
- छह महीने बाद दोबारा होगी सुरक्षा की समीक्षा
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में माओवाद खत्म होने के बाद बस्तर संभाग में सुरक्षा की समीक्षा की है। संभाग के 116 राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी में कटौती कर दी गई है। इस फेरबदल के दायरे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों दलों के कई नेता शामिल हैं। रक्षा समीक्षा के तहत कई प्रमुख और वीवीआईपी नेताओं की सुरक्षा में बदलाव किया गया है।
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा और कवासी लखमा सहित कुल नौ नेताओं की सुरक्षा श्रेणी को जेड प्लस से घटाकर जेड श्रेणी कर दिया गया है। इसके अलावा, जिन नेताओं को पहले जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, उनकी सुरक्षा को घटाकर वाई प्लस कर दिया गया है, और वाई प्लस श्रेणी वाले नेताओं की सुरक्षा को वाई श्रेणी में तब्दील कर दिया गया है।
छह महीने बाद फिर होगी समीक्षा
सरकार ने 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र माओवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसके बाद से सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। पिछले छह महीनों के दौरान जमीनी परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा को एक झटके में पूरी तरह से हटाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कम किया जा रहा है। आगामी छह महीने के बाद फिर से सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी और यदि खतरे का आकलन अलग रहता है, तो उसके अनुसार आगे निर्णय लिए जाएंगे।
- विजय शर्मा, गृह मंत्री- छत्तीसगढ़
कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने उठाए सवाल
बस्तर अंचल में माओवाद का खतरा अभी पूरी तरह से समाप्त होने की कोई आधिकारिक या व्यावहारिक गारंटी नहीं है। जनप्रतिनिधियों को अक्सर अपने क्षेत्र के अंदरूनी और दूरदराज के इलाकों में जनसंपर्क के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा में कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है। बैज ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी राज्य सरकार को लेनी होगी।
- दीपक बैज, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
पुलिस बल के बेहतर उपयोग और वित्तीय प्रबंधन की कवायद
राज्य में वर्तमान में करीब 400 राजनीतिक नेताओं और विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में 1,550 से अधिक पुलिसकर्मी और 500 से ज्यादा वाहन तैनात हैं। इन वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सालाना करीब 150 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आता है।
बस्तर में ही 1000 जवान
अकेले बस्तर संभाग की बात करें तो वहां 250 से अधिक नेताओं की सुरक्षा में 1,000 से ज्यादा जवान तैनात हैं, जिन पर सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। दूसरी ओर, राज्य पुलिस महकमे में 20 हजार से अधिक पद रिक्त पड़े हैं, जिससे थानों और मैदानी स्तर पर पुलिस बल की कमी महसूस की जा रही है। इसी संतुलन को साधने और पुलिस बल का कानून-व्यवस्था व नक्सल विरोधी अभियानों में बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से सरकार ने सुरक्षा समीक्षा की यह प्रक्रिया शुरू की है, ताकि प्रशासनिक संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सके।
किस श्रेणी में कितना सुरक्षा अमला
जेड प्लस सुरक्षा में 55 जवान (10 से 12 एनएसजी/सीआरपीएफ कमांडो), जेड श्रेणी में 22 जवान (6 कमांडो), वाई प्लस में 11 और वाई श्रेणी में 8 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।