2030 तक छत्तीसगढ़ की हरित ऊर्जा क्षमता 15,000 मेगावाट करने का लक्ष्य, CM साय ने दी जानकारी
छत्तीसगढ़ सरकार 2030 तक हरित ऊर्जा क्षमता 3,000 से 15,000 मेगावाट करेगी। CM साय ने 5.60 लाख करोड़ के निवेश का न्योता दिया, जिसमें सौर, बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन शामिल हैं।
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 09:39:07 AM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 09:39:07 AM (IST)
CM साय ने दी जानकारी। (फाइल फोटो)HighLights
- 2030 तक हरित ऊर्जा क्षमता 15,000 मेगावाट करने का लक्ष्य।
- CM विष्णु देव साय ने 5.6 लाख करोड़ निवेश का न्योता दिया।
- ऊर्जा क्षेत्र में 45% से अधिक हरित ऊर्जा का लक्ष्य।
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की हरित ऊर्जा क्षमता वर्तमान 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया है। बिजली की कुल मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी भी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ किया। साय ने उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में भाग लेते हुए बताया कि अगले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।
उन्होंने देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
साय ने साझा की निवेश की योजना
- साय ने बताया कि 23 हजार 923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये और ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार में करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसमें छत्तीसगढ़ योगदान देगा। प्रदेश में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 28 हजार मेगावाट से अधिक है। बढ़ती मांग को देखते हुए ताप विद्युत के साथ सौर, जल, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का संतुलित विकास किया जा रहा है।
बिजली की भरोसेमंद आपूर्ति के लिए 12 हजार 300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाएं चिह्नित की गई हैं। इनमें करीब 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर परियोजना के साथ 40 मेगावाट या 120 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी भंडारण प्रणाली संचालित है। सौर ऊर्जा से संचालित राजनांदगांव का खैरा गांव
- साय के अनुसार, राजनांदगांव जिले का खैरा गांव प्रदेश का पहला पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित गांव बना है। गांव के सभी 141 घरों की छतों पर दो-दो किलोवाट के सोलर पैनल लगे हैं, जिनसे कुल 282 किलोवाट बिजली बनती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 93 घरों को भी सौर बिजली मिल रही है और ग्रामीणों को इसके लिए खर्च नहीं करना पड़ा।
- प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत करीब 1.26 लाख संयंत्र लगाए गए हैं। 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 395 मेगावाट क्षमता के संयंत्र लगाने की योजना है।
ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की संभावनाओं पर चर्चा
- कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनाल और ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की संभावनाओं पर भी काम हो रहा है। कुल 80 टन क्षमता के आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों के लिए करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। निजी निवेशकों के करीब छह हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर प्रक्रिया जारी है।
करीब 4 हजार 200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना है। सरकार का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन रखते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। संसाधनों तथा ऊर्जा अधोसंरचना पर की चर्चा
- सम्मेलन में साय ने छत्तीसगढ़ के स्टाल का अवलोकन किया और निवेशकों से राज्य की औद्योगिक नीतियों, संसाधनों तथा ऊर्जा अधोसंरचना पर चर्चा की। उन्होंने नई परियोजनाओं के लिए अनुकूल वातावरण देने की प्रतिबद्धता जताई। दो से पांच नवंबर तक आयोजित सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
- इनमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता और निवेशक हैं। आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नार्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ देश एवं समूह कंट्री पार्टनर हैं। छत्तीसगढ़ सहित 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ऊर्जा क्षमता और निवेश संभावनाएं प्रस्तुत कीं। सम्मेलन की थीम ‘निवेश, नवाचार और प्रेरणा’ है।