
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. रायपुर। जनता की समस्या दूर हो या नहीं, सरकारी पोर्टल पर शिकायत बंद हो जानी चाहिए। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायतों के निराकरण में नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश कर रही है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के शिकायतों की समीक्षा में यह सामने आया है कि कई मामलों में वास्तविक और संतोषजनक समाधान किए बिना ही शिकायतों को विशेष क्लोज किया जा रहा है।
इसका तात्पर्य है कि नागरिकों की समस्या का समाधान नहीं हुआ लेकिन सरकारी रिकार्ड में निराकरण दर्ज हो गया। विभाग ने इसे अत्यंत गंभीर एवं आपत्तिजनक बताते हुए सभी नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका परिषदों व नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि शिकायत बंद करने की औपचारिकता अब नहीं चलेगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्राप्त प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसका समुचित परीक्षण किया जाए। संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के माध्यम से निर्धारित समय-सीमा में वास्तविक एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बिना वास्तविक निराकरण शिकायतें बंद करने से शासन की शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता प्रभावित होती है। इससे नागरिकों का शासन और प्रशासन पर भरोसा भी कमजोर होता है।
शिकायतों को केवल पोर्टल पर बंद कर देना निराकरण नहीं माना जाएगा। नागरिक की समस्या का वास्तविक समाधान करना जरूरी होगा। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों, समस्याओं और सुझावों का एक काल पर समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से त्वरित निराकरण करना है।
विभाग ने साफ किया है कि हेल्पलाइन पर मिलने वाली हर शिकायत का गंभीरता से परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में समाधान करना होगा। विशेष क्लोज की अनुमति केवल मांग से संबंधित शिकायतों और दूसरे विभाग के कार्यक्षेत्र में आने वाले मामलों में होगी। इनमें भी उचित परीक्षण जरूरी है। इसके अलावा किसी अन्य स्थिति में शिकायत को विशेष क्लोज करना स्वीकार्य नहीं होगा।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण के लिए चारस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत एल-एक पर ब्लाक स्तर, एल-दो पर जिला स्तर, एल-तीन पर संभागीय या निदेशालय स्तर और एल-चार पर सचिव या विभागाध्यक्ष स्तर पर शिकायतों का निराकरण किया जाएगा। तय समय-सीमा में समाधान नहीं होने पर शिकायत स्वतः अगले स्तर पर पहुंच जाती है।