
रायपुर, राज्य ब्यूरो। केंद्रीय पूल में केवल अरवा चावल लेने की जिद ने राज्य सरकार और यहां के 416 उसना राइस मिलरों और कर्मचारियों को संकट में डाल दिया है। संकट का समाधान तलाशने राज्य के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत अफसरों के साथ दिल्ली तक गए, लेकिन केंद्र सरकार उसना चावल लेने को राजी नहीं हुई। भगत ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मिलने के लिए समय भी मांगा था, मगर समय नहीं दिया। टेलीफोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र के स्टाक में उसना चावल इतना ज्यादा है कि नया नहीं ले सकते।
केंद्र के इस फैसले पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ी आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि हम इस मामले में प्रधानमंत्री से आग्रह करेंगे। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पहले केंद्र सरकार अब तक अरवा के साथ उसना चावल भी लेती रही है। केंद्र ने ही उसना राइस मिलों को बढ़ावा दिया। अब मिल लग गए हैं तो कह रहे हैं उसना चावल नहीं लेंगे। बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार यह बात पहले बता देती तो हम किसानों से कहत देते कि उसना क्वालिटी के धान की खेती न करें।
5.93 लाख टन मासिक उत्पादन क्षमता
खाद्य विभाग के अफसरों के अनुसार राज्य में 416 उसना राइस मिल हैं। इनकी मासिक उत्पादन क्षमता 5.93 लाख टन है। यदि केंद्र सरकार उसना चावल नहीं लेगी तो धान का समय पर निराकरण नहीं हो पाएगा। एक समस्या यह भी है कि केंद्र सरकार ने इस बार अरवा की क्वालिटी को लेकर भी सख्ती कर दी है।
23 लाख टन उसना चावल लेने का आग्रह
केंद्र सरकार ने इस बार राज्य के 61.65 लाख टन चावल केंद्रीय पूल में लेने का फैसला किया है। खाद्य मंत्री भगत के अनुसार इस वर्ष समर्थन मूल्य पर किसानों से 105 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। इससे 71 लाख टन चावल तैयार होगा। राज्य में पीडीएस में 24 लाख टन चावल की आवश्यकता होगी। भारतीय खाद्य निगम में 24 लाख टन अरवा चावल जमा किया जाना है। इसके अतिरिक्त 23 लाख टन उसना चावल भी हम केंद्रीय पूल में लिए जाने का आग्रह कर रहे हैं।
उसना प्लांट में अरवा चावल तैयार करना कठिन
प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश रुंगटा का कहना है कि दोनों प्लांटों की तकनीकी में बहुत अंतर है। उसना राइस मिल की लागत अरवा की तुलना में अधिक है, उसे अरवा में प्लांट में तब्दील करने में खर्च और बढ़ जाएगा। इसके बाद भी मिल की लागत नहीं निकल पाएगी।