• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

पहाड़ी कोरवा बस्ती के बच्चों को मिला नया ठिकाना, 11.69 लाख में बदली दूरस्थ गांव की तस्वीर

सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड की लालमाटी पहाड़ी कोरवा बस्ती में 11.69 लाख रुपये की लागत से नया आंगनबाड़ी भवन बना है। यह बच्चों को पोषण, प्रारंभिक श...और पढ़ें

By Amit SinghEdited By: Amit Singh
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 09:40:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 09:40:40 PM (IST)
पहाड़ी कोरवा बस्ती के बच्चों को मिला नया ठिकाना, 11.69 लाख में बदली दूरस्थ गांव की तस्वीर

डिजिटल डेस्क, रायपुर। दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती के नन्हे बच्चों को अब पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और नियमित गतिविधियों के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है। सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत लालमाटी स्थित पहाड़ी कोरवा बस्ती में 11.69 लाख रुपये की लागत से नया आंगनबाड़ी भवन तैयार किया गया है। स्थायी भवन उपलब्ध होने से बच्चों को एक ही स्थान पर आंगनबाड़ी की विभिन्न सेवाओं से जोड़ने की राह आसान हुई है। वहीं माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं और जानकारियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की योजनाओं और विभागीय अभिसरण के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती में बना नवीन आंगनबाड़ी भवन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


11.69 लाख रुपये में तैयार हुआ नया आंगनबाड़ी भवन

पहाड़ी कोरवा बस्ती में नवीन आंगनबाड़ी भवन का निर्माण वीबी जी राम जी और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से 11.69 लाख रुपये की लागत से किया गया है। नया भवन मिलने से केंद्र की गतिविधियों के नियमित और व्यवस्थित संचालन के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध हुआ है।

इससे बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने के साथ आंगनबाड़ी की सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने में भी सहूलियत हुई है। दूरस्थ बस्ती में ही केंद्र उपलब्ध होने से बच्चों और महिलाओं को विभिन्न सेवाओं एवं गतिविधियों से जोड़ना आसान हुआ है।

पहाड़ी कोरवा बच्चों को मिला पोषण और सीखने का बेहतर माहौल

आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती में नया भवन बनने से बच्चों के लिए नियमित गतिविधियों के संचालन की बेहतर व्यवस्था हुई है। अब उन्हें निर्धारित स्थान पर पोषण संबंधी सेवाओं के साथ प्रारंभिक शिक्षा और विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

स्थायी भवन से बच्चों को नियमित रूप से केंद्र से जोड़ने और उनके पोषण एवं प्रारंभिक विकास से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में सहायता मिल रही है। अभिभावकों के लिए भी बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचाना सुविधाजनक हुआ है।

माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी बना सेवाओं का केंद्र

नया आंगनबाड़ी भवन केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है। केंद्र के माध्यम से उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न सेवाओं के साथ पोषण, मातृ एवं शिशु देखभाल तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों से जोड़ा जा रहा है।

नया भवन उपलब्ध होने से इन गतिविधियों के आयोजन के लिए भी एक निश्चित स्थान मिला है। बच्चों, माताओं और किशोरी बालिकाओं को एक ही छत के नीचे सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था ने दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती में आंगनबाड़ी केंद्र की पहुंच और उपयोगिता को मजबूत किया है।

विभागीय अभिसरण से दूरस्थ जनजातीय बस्ती तक पहुंची सुविधा

वीबी जी राम जी और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से तैयार यह भवन दूरस्थ जनजातीय बसाहटों में आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में उपयोगी पहल बनकर सामने आया है। इससे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के साथ महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं के लिए भी स्थानीय स्तर पर सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि योजनाओं के अभिसरण से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाकर बच्चों और महिलाओं को उनके गांव में ही बेहतर सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।