
रायपुर। Raipur Local Edit: प्रदेश सरकार ने श्री धन्वन्तरी जेनेरिक दवा दुकानों की योजना को मूर्त रूप देकर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ तथा बेहतर बनाने की दिशा में सार्थक कदम उठाया है। जागरूक लोग इन दवाओं का उपयोग कर अधिक कीमत के कारण इलाज में आने वाली परेशानियों से उबरने में काफी हद तक सक्षम हो सकेंगे। स्वजन के इलाज के कारण परिवार के भारी कर्ज में डूब जाने की समस्या कुछ हद तक कम होगी। इन दवा दुकानों में कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध होंगी। यहां दवाएं अधिकतम विक्री मूल्य (एमआरपी) से 50 फीसद से 71 प्रतिशत तक कम कीमत पर मिलेंगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ 84 दुकानों का शुभारंभ कर ठोस पहल की है। अब व्यवस्था से जुड़े लोगों के समक्ष चुनौती होगी कि उन दुकानों पर दवाओं की पर्याप्त मात्रा में अनवरत आपूर्ति बनी रहे। डाक्टर भी जेनेरिक दवा लिखने के लिए आगे आएं और लोगों में इन दवाओं के प्रति विश्वास कायम हो। अन्य सरकारी योजनाओं की तरह उदासीनता बरते जाने पर इन दवा दुकानों को खोलने का उद्देश्य समय से पहले ही दम तोड़ देगा क्योंकि इन दुकानों से आय सीमित होगी, जिसकी वजह से संचालकों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी बनी रहेंगी।
इसके लिए जरूरी है कि इन दुकानों की कार्यप्रणाली और व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी जाए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना में प्रदेश के 169 शहरों और कस्बों में अस्पतालों के निकट 188 दुकानें शुरू की जानी हैं जहां 251 प्रकार की जेनेरिक दवाइयां और आपरेशन के लिए 27 उपकरण उपलब्ध होंगे। इसकेअलावा वन विभाग के संजीवनी के उत्पाद, सौंदर्य प्रसाधन उत्पाद और शिशु आहार की भी बिक्री की जाएगी। सरकार का दावा है कि उक्त दुकानों में 20 ब्रांडेड कंपनियों की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध होंगी, जो सस्ती होने केसाथ गुणवत्तापूर्ण भी होंगी।
दुकानों के संचालन में सहायता के लिए सरकार की तरफ से बहुत ही कम किराए पर दुकान उपलब्ध करवाने का भी प्रविधान किया है। सरकार की यह योजना गरीबों के साथ-साथ निम्न मध्यमवर्ग के लोगों को कर्ज में डूबने से बचा सकती है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि डाक्टरों को जेनेरिक दवा लिखने के लिए प्रोत्साहित करने में सरकार सफल हो सके। इलाज के दौरान मरीज के स्वजन आमतौर पर डाक्टर की हर बात मानते हैं। पर्ची पर जेनेरिक दवा लिखी होने पर ही वह खरीदेंगे।
लोगों में सस्ती दवाओं को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है। आम धारणा है कि जेनरिक दवाएं कारगर नहीं होती। इसलिए जरूरी है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) जैसी संस्थाओं का भी सहयोग लेकर जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जाए। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार इसके क्रियान्यवन में आने वाली बाधाओं को समझकर दूर करेगी और लोगों को सस्ती दवाओं का लाभ मिलता रहेगा।