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छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षकों की संख्या घटी, 57 हजार शिक्षक भर्ती के वादे के बीच दो साल में 2582 टीचर घटे: कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर शिक्षक भर्ती को लेकर हमला बोला।

By Abhishek RaiEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 07:39:33 AM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 07:39:33 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षकों की संख्या घटी, 57 हजार शिक्षक भर्ती के वादे के बीच दो साल में 2582 टीचर घटे: कांग्रेस
कांग्रेस का आरोप - शिक्षक भर्ती के नाम पर सिर्फ घोषणाएं कर रही सरकार (AI Generated Image)

HighLights

  1. एकल-शिक्षक स्कूलों से बिगड़ रही शिक्षा व्यवस्था
  2. बस्तर-सरगुजा के छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
  3. कांग्रेस सड़क से विधानसभा तक उठाएगी मुद्दा

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है।

57 हजार भर्ती के वादे पर सवाल

बैज ने कहा कि भाजपा सरकार ने 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था, लेकिन डीएड-बीएड उत्तीर्ण और टीईटी पास बेरोजगार युवाओं को निराश किया है। सरकार भर्ती के नाम पर केवल घोषणाएं कर रही है, जमीन पर काम नहीं दिख रहा।

यू-डायस के आंकड़ों से किया खुलासा

उन्होंने यू-डायस प्लस के आंकड़ों का हवाला दिया। उनके मुताबिक प्रदेश में सरकारी शिक्षकों की संख्या लगातार घट रही है। दो वर्षों में कुल 2,582 शिक्षक कम हुए हैं। वर्ष 2023-24 में 1,88,721 शिक्षक थे, जो 2024-25 में घटकर 1,88,578 रह गए। वहीं 2025-26 में यह संख्या 1,86,139 हो गई है।


बस्तर-सरगुजा में शिक्षा पर असर

बैज ने कहा कि एकल-शिक्षक और शिक्षक-विहीन स्कूलों की समस्या बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर बस्तर, सरगुजा और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

भर्ती की मांग, आंदोलन की चेतावनी

उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 27,069 नियमित शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा सरकार में नियुक्तियों की गति धीमी है। उन्होंने मांग की कि शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की जाए और सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं। कांग्रेस बेरोजगार युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को सड़क से विधानसभा तक उठाएगी।