
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 16, 18 और 20 अक्टूबर को होने वाले महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्टेडियम को इन तीनों मैचों के आयोजन की सशर्त अनुमति दे दी है। इसके लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल में 20 लाख रुपये जमा कराने होंगे। यह राशि क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की योजना पर खर्च की जाएगी। एनजीटी ने यह आदेश छह अक्टूबर को सुनाया।
एनजीटी ने स्टेडियम में क्रिकेट मैदान के रखरखाव के लिए भूजल के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि स्टेडियम में मैदान के रखरखाव के लिए 828 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलडी) भूजल का उपयोग किया जा रहा है। स्टेडियम में 150 केएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए जाने की जानकारी भी दी गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि एसटीपी से वास्तव में कितना उपचारित पानी तैयार हो रहा है और उसमें से कितना पानी मैदान के रखरखाव में इस्तेमाल किया जा रहा है।
एनजीटी ने इससे पहले दो जुलाई 2026 को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम समेत तीन स्टेडियमों में अगली सुनवाई तक खेल गतिविधियां आयोजित करने पर रोक लगा दी थी। रायपुर के अलावा राजस्थान के सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर और मुंबई के डा. डीवाई पाटिल स्टेडियम को भी इस आदेश में शामिल किया गया था। इन स्टेडियमों से बार-बार नोटिस के बावजूद अनुपालन रिपोर्ट नहीं मिलने को एनजीटी ने गंभीरता से लिया था।
छह अक्टूबर की सुनवाई में एनजीटी के सामने बताया गया कि संबंधित स्टेडियम में मैदान के रखरखाव के लिए 828 केएलडी भूजल इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि स्टेडियम में 150 केएलडी क्षमता का एसटीपी स्थापित होने की बात कही गई, लेकिन उपचारित पानी के वास्तविक उत्पादन और उसके उपयोग की जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) की ओर से भी कहा गया कि स्टेडियम मुख्य रूप से भूजल का इस्तेमाल कर रहा है और अभी तक एसटीपी के उपचारित पानी पर पूरी तरह स्थानांतरित नहीं हुआ है।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि भूजल एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है और उसका उपयोग जरूरी कार्यों के लिए तर्कसंगत तरीके से किया जाना चाहिए। अधिकरण ने निर्देश दिया कि मैदान के रखरखाव में भूजल की जगह एसटीपी से उपचारित पानी के इस्तेमाल के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।
रायपुर स्टेडियम की ओर से एनजीटी को बताया गया कि यहां 16, 18 और 20 अक्टूबर को महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच प्रस्तावित हैं। इन मैचों के लिए स्टेडियम के इस्तेमाल की अनुमति मांगी गई थी। एनजीटी ने परिस्थितियों को देखते हुए पहले लगाए गए अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए इन तीन तारीखों को क्रिकेट मैदान के उपयोग की अनुमति दे दी।
हालांकि यह अनुमति बिना शर्त नहीं है। स्टेडियम को 20 लाख रुपये छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल में जमा कराने होंगे। मंडल इस राशि से संबंधित क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की योजना तैयार करेगा और अगली सुनवाई से पहले उसकी जानकारी एनजीटी को देगा।
एनजीटी ने स्टेडियम प्रबंधन को यह भी निर्देश दिया है कि मैदान के रखरखाव के लिए भूजल की जगह एसटीपी के उपचारित पानी का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव प्रयास किए जाएं। इस संबंध में स्टेडियम को अगली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
मामला केवल रायपुर स्टेडियम तक सीमित नहीं है। एनजीटी ने क्रिकेट मैदानों के रखरखाव में पेयजल और भूजल के इस्तेमाल को लेकर पहले ही दिशा-निर्देश दिए थे। अधिकरण ने कहा था कि क्रिकेट और अन्य खेल मैदानों के रखरखाव में, जहां संभव हो, उच्च गुणवत्ता वाले एसटीपी उपचारित पानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही वर्षाजल संचयन और उसके भंडारण व भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसके बाद 17 जुलाई 2023 की बैठक में देश के क्रिकेट स्टेडियमों को वर्षाजल संचयन व्यवस्था स्थापित करने और ताजे पानी पर निर्भरता कम करने के निर्देश दिए गए थे। स्टेडियम प्रबंधन को उपचारित पानी के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने और जरूरत के अनुसार एसटीपी स्थापित करने की समयसीमा तय करने के लिए भी कहा गया था।
इसी बैठक में यह भी सामने आया था कि छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ की ओर से बैठक में कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था और सीजीडब्ल्यूए को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के स्वामित्व की स्थिति की पुष्टि कर अनुपालन के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया था।
एनजीटी ने संबंधित आवेदनों का निपटारा करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक रायपुर स्टेडियम प्रबंधन को भूजल की जगह एसटीपी उपचारित पानी के इस्तेमाल की दिशा में किए गए प्रयासों की रिपोर्ट देनी होगी।