
नईदुनिया ब्यूरो ,नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में कार्यकारिणी के पुनर्गठन को लेकर प्रदेश कांग्रेस ,पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के साथ एकराय बनाने में असफल रही है,वहीँ विधायकों के संगठन में पद देने को लेकर भी पार्टी में मतभेद है,ऐसे में आलाकमान से राय लेने का फैसला किया गया है ।
जानकारी मिली है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात करने के लिए प्रदेश कांग्रेस के नेता इसी सप्ताह दिल्ली आयेंगे । पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने विधायकों को संगठन में पद देने के सवाल पर कहा कि हम फिलहाल विधायकों की क्षेत्र में व्यस्तता को देखते हुए उन्हें पध से दूर रखने को लेकर एकमत है ।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने अजीत जोगी से प्रदेश संगठन के लिए उनके पसंदीदा लोगों का नाम माँगा था लेकिन उन्होंने यह कह कर नाम देने से इनकार कर दिया कि इससे विवाद और बढेगा ।बताया जाता है कि अजीत जोगी ने गोपनीयता बरतने की वजह बताकर संगठन को लेकर अपनी राय पार्टी आलाकमान को देने की बात कही है।
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में कांग्रेस इस बार आम सहमति बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। जानकारी मिली है कि पार्टी ने अजीत जोगी ,डॉ चरणदास महंत ,टी एस बाबा इत्यादि दिग्गज नेताओं से उपाध्यक्ष पद के लिए एक-एक नाम का प्रस्ताव माँगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संगठन के पुनर्गठन में उन लोगों की कुर्सियां बरकरार रहेंगी,जिन्हें हाल के दिनों में संगठन में शामिल किया गया था ऐसे में अचल श्रीवास्तव और श्रीश देवांगन के अपने पद पर बने रहने की सम्भावना है ।
पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती संगठन मे जाति और क्षेत्र के आधार पर प्रतिनिधित्व दिए जाने की है ।पार्टी के नेता प्रतिपक्ष टी एस बाबा ने कहा है कि हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के जातीय समूहों और सभी क्षेत्रों को प्रदेश कार्यकारिणी में उचित जगह मिले ।