
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। चक्रवाती तूफान अर्णब का असर गुरुवार से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है, इसके असर से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कहीं खेतों में कटी फसल पानी में डूबी है तो कहीं तेज हवा से खड़ी धान जमीन पर बिछ गई है। लगातार नमी के कारण धान के दाने खराब होने, काले पड़ने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है।
खरीफ सीजन में करीब 36 से 40 लाख हेक्टेयर में धान की फसल लगी है। अधिकांश क्षेत्रों में कटाई शुरू नहीं हुई है। लगातार बारिश से खेतों में जलभराव होने पर पकी फसल के गिरने और धान के दाने काले पड़ने का खतरा है। रायपुर के किसानों के अनुसार, कुछ इलाकों में स्वर्ण वैरायटी की धान को 75 से 90 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपये की लागत के साथ संभावित 40 हजार रुपये तक का मुनाफा भी संकट में है।
बारिश से प्रभावित रकबे और कुल नुकसान का आधिकारिक आकलन अभी सामने नहीं आया है। पटवारियों की हड़ताल के कारण गिरदावरी प्रभावित होने से नुकसान दर्ज करने और मुआवजा प्रक्रिया में देरी की आशंका है। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित किसानों की पहचान और नुकसान का आकलन कराने की चुनौती होगी।
गुरुवार को रायपुर में 36.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश से तापमान में गिरावट आई है। शहर का अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 6.9 डिग्री कम है। 30 अक्टूबर को भी रायपुर में आसमान मेघमय रहने और एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिण ओडिशा के ऊपर बना अवदाब उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है। इसके 29 अक्टूबर की शाम तक कमजोर होकर उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे लगे उत्तर-पश्चिमी ओडिशा के ऊपर स्पष्ट कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है। उक्त क्षेत्र के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है। इसके बाद प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना भी जताई गई है।
तत्काल सर्वे कर किसानों को दिलाएं राहत
अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में तत्काल सर्वे कराया जाए। प्रभावित किसानों के प्रकरण तैयार कर शासन के प्रचलित नियमों एवं योजनाओं के अंतर्गत पात्रतानुसार राहत और सहायता उपलब्ध कराई जाए।
- सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी कृषि उत्पादन आयुक्त