श्रवण शर्मा

रायपुर नईदुनिया प्रतिनिधि

पूरी दुनिया को न दिखने वाले कीटाणु ने दहशत में डाल दिया है। बड़े-बड़े तीसमार खां भी इससे डरकर घर में बैठे हैं। जो पहलवान अपनी ताकत और दांव-पेंच के दम पर बड़े-बड़े पहलवानों को चित कर देते थे और चारों ओर से तालियां गूंज उठती थी, वे भी इस बार नागपंचमी पर 25 जुलाई को वैसा दमखम, दांवपेंच, जोर-आजमाइश नहीं दिखा पाएंगे। छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में कोरोना महामारी के चलते पुनः लॉकडाउन लग गया है। नागपंचमी पर हर साल अखाड़ों में होने वाला भव्य दंगल (कुश्ती प्रतियोगिता) पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। अब न गुढ़ियारी के बाड़े (पड़ाव) में दंगल प्रतियोगिता होगी औ न ही जैतूसाव के अखाड़े में पहलवान दांवपेंच दिखा पाएंगे।

नहीं सुनाई देगी ढोल-बाजों की धमक

नागपंचमी पर राजधानी के तीन स्थानों कुशालपुर के दंतेश्वरी अखाड़ा, पुरानी बस्ती के जैतूसाव मठ अखाड़ा और गुढ़ियारी के सिकंदर शक्ति अखाड़ा के नेतृत्व में भव्य कुश्ती प्रतियोगिताओं का आयोजन सालों से होता आ रहा है। इसे देखने के लिए कुश्ती प्रेमियों का हुजूम उमड़ता था। इस बार कोरोना महामारी के चलते सभी अखाड़ों ने कुश्ती प्रतियोगिताओं को रद कर दिया है। इस साल न ढोल-बाजों की धमक सुनाई देगी और न ही छोटे-छोटे पहलवानों की टोली नाचते हुए कुश्ती मैदान या अखाड़ा की ओर जाती दिखेगी।

पूर्व राष्ट्रपति आए थे जैतूसाव मठ अखाड़े के जीर्णोद्धार पर

जैतूसाव मठ के ट्रस्टी अजय तिवारी बताते हैं कि 1910 से अखाड़े का संचालन किया जा रहा है। अखाड़े का जीर्णोद्धार आजादी के बाद किया गया था। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जब रायपुर आए थे तब उन्होंने अखाड़े का पुनः लोकार्पण किया था। यहां हर साल भव्य कुश्ती प्रतियोगिता होती है, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते आयोजन नहीं किया जा रहा है। नागपंचमी पर इस बार अखाड़े की मिट्टी को हनुमानजी का रूप देकर विराजित किया जाएगा।

100 साल पुराने दंतेश्वरी मंदिर में नहीं होगी कुश्ती

कुशालपुर स्थित प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर के अखाड़े में 100 साल से कुश्ती आयोजित की जा रही है। पहलवान अशोक यादव बताते हैं कि पिछले कुछ सालों से लड़कियों की भी कुश्ती हो रही है। अनेक लड़कियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इस साल कोरोना ने पहलवानों को भी एक-दूसरे को पटखनी न देने के लिए मजबूर कर दिया है।

75 साल में पहली बार कुश्ती नहीं

गुढ़ियारी स्थित सिकंदर शक्ति व्यायामशाला के तोरणलाल साहू बताते हैं कि 75 सालों में पहली बार कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया जा रहा है। कोरोना से बचने के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है, जबिक एक-दूसरे को उठा-पटक किए बिना कुश्ती नहीं खेली जा सकती। प्रतियोगिता को देखने के लिए भी हजारों लोग जुटते हैं। नागपंचमी के अलावा अन्य दिनों में आयोजन किया जा सकता था किंतु अब अगले दो-तीन महीने तक इसकी गुंजाइश नहीं है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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