
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. रायपुर। अदालत में गलत तथ्य पेश करने और झूठी गवाही देने के आरोपों का सामना कर रहे छत्तीसगढ़ के इंटेलिजेंस चीफ और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमित कुमार समेत सीबीआई के पूर्व और वर्तमान छह अधिकारियों को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने इन सभी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के अपने पूर्व आदेश पर अगली सुनवाई तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है।
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि इस स्तर पर अंतरिम राहत नहीं दी गई, तो आवेदकों को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ सकती है। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लग गई है।
यह पूरा कानूनी विवाद पूर्व भारतीय राजस्व सेवा से जुड़े IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल से जुड़ा हुआ है। अग्रवाल ने सीबीआई अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अदालत के समक्ष सरकार के साथ हुए पत्राचार को लेकर भ्रामक और गलत जानकारी प्रस्तुत की है। इस शिकायत के आधार पर पूर्व में जस्टिस मधु जैन की पीठ ने अग्रवाल की याचिका को स्वीकार करते हुए विशेष सीबीआई न्यायाधीश को इन छह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
प्रभावित अधिकारियों में छत्तीसगढ़ के इंटेलिजेंस चीफ अमित कुमार के अलावा आईपीएस अधिकारी सुशील दीवान, विनीत विनायक, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद शामिल हैं। घटनाक्रम के उस दौर में अमित कुमार सीबीआई में डीआईजी के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
कार्रवाई के निर्देश के बाद सीबीआई के पूर्व डीएसपी सुशील दीवान और रमन दीवान ने अदालत में याचिका दायर कर आदेश को वापस लेने की मांग की। उनका मुख्य तर्क यह था कि इस तरह का बड़ा आदेश पारित करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। सुनवाई के दौरान खुद सीबीआई ने भी इन अधिकारियों की याचिकाओं का पूरी तरह समर्थन किया। अदालत ने छह अक्टूबर के अपने आदेश के संबंधित निर्देशों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। हालांकि, इन तमाम आरोपों और विवादों पर अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है। के आरोप में घिरे इंटेलिजेंस चीफ अमित कुमार समेत छह आइपीएस अफसरों को राहत