
रायपुर। सरकारी किताबों के वितरण में हेराफेरी चल रही है। राज्य के निजी स्कूल संचालक यू-डाइस पर बच्चों की संख्या कम दिखा रहे हैं और किताब लेने की बारी आई तो फर्जी चालान बनाकर मनमानी बच्चों की संख्या दिखाकर किताबें ले रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि निजी स्कूलों के फर्जी चालान को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) भी आंख मूंदकर पास कर रहे हैं। काइदे से यू-डाइस पर अपडेट डेटा और मांगपत्र को मिलान करना चाहिए। गड़बड़ी का खुलासा हुआ है मुंगेली और सक्ती जिलों समेत विभिन्न जिलों से आ रही मांग संख्या और और यू-डाइस पर ऑनलाइन एंट्री की गई संख्या के भिन्नता के कारण।
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के पास मामला पहुंचा तो यहां के महाप्रबंधक ने लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के लिए कहा है। वहीं अब मामले में शिक्षा अफसर अब जिम्मेंदारों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं और ऐसे स्कूलों की मान्यता रद करने का भी दावा कर रहे हैं।
केस 01
फर्जी चालान पेश कर ले लिया किताब
शशि संतोष विद्या मंदिर हाईस्कूल पेंडरूवां विकासखंड डभरा शैक्षणिक जिला सक्ती जांजगीर-चांपा के स्कूल प्रबंधक कम्प्यूटर में फर्जी चालान बनाकर किताब लेने पहुंचा। यहां डीईओ ने भी इसकी जांच किये बिना ही किताबों के लिए अनुशंसा कर दी है। ऐसे ही प्रकरण लगातार आ रहे हैं। निगम ने स्कूल प्रबंधक के खिलाफ फर्जी चालान बनाने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा है।
केस 02
330 की जगह दिखा दिया 1068 किताबों की मांग
सरस्वती शिशु मंदिर सरगांव जिला मुंगेली के निगम पोर्टल के ऑनलाइन चालान में पहली कक्षा से 10वीं तक हिन्दी माध्यम की कुल 1068 मांग की गई है, जिसका प्रमाणीकरण जिला शिक्षा अधिकारी ने खुद किया है। जबकि शिक्षा सत्र 2018-19 के लिए लोक शिक्षण संचालनालय पाठ्यपुस्तकों की संख्या 330 दी है। इस प्रकार ऑनलाइन संख्या और पूर्व में दी गई संख्या में व्यापक भिन्नता मिल रही है।
हर जिले में निजी स्कूलों के लिए अस्थायी डिपो
राज्य के 10 हजार निजी स्कूलों में 8 लाख से अधिक किताबें निःशुल्क बंटनी है। इस बार पाठ्यपुस्तक निगम ने सभी जिलों में अस्थायी डिपो बना दिया है। पहली बार जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की अनुशंसा पर किताबें बांटी जा रही है, लेकिन यू-डाइस में निजी स्कूलों को मान्यता और सीटों की सही संख्या जांचे बिना ही कुछ जिलों के लिए डीईओ मनमानी अनुशंसा कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की कार्यकारिणी ने फैसला लिया है कि जब तक डीईओ अनुशंसा नहीं करेंगे, तब तक किसी भी हाल में निजी स्कूलों को किताबें नहीं दी जाएंगी। पिछले सालों में कुछ स्कूलों की मान्यता नहीं होने के बाद भी किताबें ले जाने की शिकायत मिलने के बाद यह फैसला लिया गया। पिछली बार भी कई स्कूलों ने बच्चों की संख्या से अधिक किताबें ले ली थीं।
कार्रवाई की जाएगी
जिला शिक्षा अधिकारियों को मांगपत्र और ऑनलाइन यू-डाइस डेटा मिलान करना चाहिए। गड़बड़ी की शिकायत आई है। इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - एस प्रकाश, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय।
डेटा भिन्न मिले हैं
निजी स्कूलों की किताबों के वितरण के लिए इस बार सभी जिलों में अस्थायी डिपो की व्यवस्था की गई। कुछ जगहों पर मांगपत्र और ऑनलाइन यू-डाइस डेटा भिन्न मिले हैं। - अशोक चतुर्वेदी, महाप्रबंधक, पाठ्यपुस्तक निगम।