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बिना माल खरीदे-बेचे हड़प लिए करोड़ों रुपये, रायपुर का लोहा व्यापारी गिरफ्तार, 5 महीने से था फरार

Raipur GST Scam: रायपुर में कर चोरी और फर्जी बिलिंग के जरिए सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले आरोपित को गिरफ्तार किया गया है।

By Deepak ShuklaEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Tue, 16 Jun 2026 06:24:52 PM (IST)Updated Date: Tue, 16 Jun 2026 06:24:52 PM (IST)
बिना माल खरीदे-बेचे हड़प लिए करोड़ों रुपये, रायपुर का लोहा व्यापारी गिरफ्तार, 5 महीने से था फरार
फर्जी बिलिंग के जाल पर DGGI की कार्रवाई। (AI से जेनरेट किया गया इमेज)

HighLights

  1. फर्जी बिलिंग के जाल पर डीजीजीआई की कार्रवाई
  2. 6.93 करोड़ के फर्जी घोटाले में कारोबारी गिरफ्तार
  3. बिना माल की खरीद-फरोख्त के करोड़ों का ITC हासिल

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। कर चोरी और फर्जी बिलिंग के जरिए सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले आरोपित को गिरफ्तार किया गया है।

महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) रायपुर ने लगभग 6.93 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले के मामले में ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुजीत मलिक के नेतृत्व में की गई।

बिना माल की खरीद-फरोख्त के हासिल किया करोड़ों का ITC

जांच में सामने आया है कि आरोपित ने बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-फरोख्त के फर्जी दस्तावेजों और बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का आइटीसी हासिल किया और उसका उपयोग भी किया। डीजीजीआइ ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा के तहत गिरफ्तारी कर कार्रवाई की है।


फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से लिया गया ITC

डीजीजीआई अधिकारियों की जांच में राजफाश हुआ कि ओम किरण इस्पात उद्योग कई अस्तित्वहीन, फर्जी और गैर-संचालित फर्मों के बहुस्तरीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। इन्हीं फर्मों के माध्यम से फर्जी बिल जारी कर अवैध आइटीसी प्राप्त किया जा रहा था।

जांच के दौरान जीएसटी रिटर्न, जीएसटीआर-2ए और अन्य दस्तावेजों के विश्लेषण में पाया गया कि बड़ी मात्रा में आइटीसी ऐसे जीएसटी पंजीकरणों से लिया गया था, जिन्हें बाद में विभाग द्वारा निलंबित या निरस्त कर दिया गया।

पांच माह से फरार था आरोपी

अधिकारियों के अनुसार आरोपित पिछले करीब पांच माह से जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने विभिन्न न्यायालयों में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी लगाए। मामला अंततः सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद डीजीजीआइ की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

जांच जारी

डीजीजीआई ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। फर्जी बिलिंग नेटवर्क के अन्य सदस्यों, धन के लेन-देन की श्रृंखला और पूरे सिंडिकेट में शामिल लोगों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।