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छत्तीसगढ़ में एक-एक बेसहारा पशु और आवारा कुत्तों का तैयार होगा डिजिटल रिकार्ड, इस पोर्टल पर होगा पंजीयन

छत्तीसगढ़ में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने शहरों में घूमने वाले बेसहारा पशुओं और आवारा कुत्तों की डिजिटल कुंडली तैयार करने के निर्देश दिए हैं। भार...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 06:17:39 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 06:19:14 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में एक-एक  बेसहारा पशु और आवारा कुत्तों का तैयार होगा डिजिटल रिकार्ड, इस पोर्टल पर होगा पंजीयन
आवारा पशुओं की डिजिटल जानकारी जुटाने की प्रतीकात्मक एआई तस्वीर।

HighLights

  1. आवारा पशुओं और कुत्तों के बनेंगे डिजिटल रिकार्ड
  2. भारत पशुधन पोर्टल पर होगा ऑनलाइन पंजीयन
  3. नसबंदी और टीकाकरण डेटा की होगी निगरानी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में घूम रहे बेसहारा पशुओं और आवारा कुत्तों की अब डिजिटल पहचान सुनिश्चित की जाएगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को निर्देश जारी कर भारत पशुधन पोर्टल पर इन पशुओं का व्यवस्थित पंजीयन करने को कहा है। शहरी इलाकों में पहली बार इस तरह की डिजिटल रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे आवभगत और प्रबंधन से जुड़े आंकड़े पारदर्शी तरीके से सामने आ सकेंगे।

केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित भारत पशुधन पोर्टल पर अब शहरी क्षेत्रों के बेसहारा पशुओं और कुत्तों का पूरा ब्योरा दर्ज किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत पशु जन्म नियंत्रण यानी एबीसी कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित होने वाले तमाम केंद्रों की मैपिंग भी ऑनलाइन पोर्टल पर की जाएगी। पंजीकृत किए जाने वाले सभी बेसहारा पशुओं का रजिस्ट्रेशन वेरिफायर के माध्यम से पूरा किया जाएगा, जिससे फर्जी या दोहरे आंकड़ों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो सके।


नसबंदी और टीकाकरण के आंकड़े होंगे अपलोड

निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला पशु चिकित्सक के साथ आपसी समन्वय स्थापित करें। इसके साथ ही, एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक जितने भी पशुओं की नसबंदी और टीकाकरण का कार्य किया गया है, उसकी पूरी रिपोर्ट भारत पशुधन पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड की जाएगी। 31 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर में कुल 36,635 नसबंदी, 61,922 टीकाकरण और 53,006 डीवार्मिंग के कार्य किए जा चुके हैं।

निगरानी होगी आसान और पारदर्शी

अधिकारियों का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से प्रत्येक निकाय के पास शहरवार बेसहारा पशुओं की सटीक और अपडेटेड जानकारी उपलब्ध होगी। इससे न केवल नसबंदी और टीकाकरण अभियानों की प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी, बल्कि आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिक और डेटा-आधारित समाधान खोजना भी काफी आसान हो जाएगा। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर पोर्टल पर डेटा दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए हैं।