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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

CGMSC Scam: सरकार बदलने का था डर, एक माह में हुई 411 करोड़ की खरीदी… कंपनी का डायरेक्टर गिरफ्तार

सीजीएमएससी) में 411 करोड़ के रिएजेंट और उपकरण खरीदी घोटाले के मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया गया है। शशांक चो...और पढ़ें

By Shashank Shekhar BajpaiEdited By: Shashank Shekhar Bajpai
Publish Date: Thu, 30 Jan 2025 01:07:42 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Jan 2025 01:07:42 PM (IST)
CGMSC Scam: सरकार बदलने का था डर, एक माह में हुई 411 करोड़ की खरीदी… कंपनी का डायरेक्टर गिरफ्तार
पेशी के दौरान मोक्षित कार्पोरेशन का डायरेक्टर शशांक।

HighLights

  1. 411 करोड़ के रिएजेंट सप्लाई में दुर्ग की कंपनी पर घोटाले का आरोप।
  2. पंचकूला, रायपुर और दुर्ग की कंपनियों पर भी दर्ज की गई एफआईआर।
  3. दो दिन तक पूछताछ करने के बाद कंपनी डायरेक्टर को किया गिरफ्तार।

जितेंद्र सिंह दहिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) में 411 करोड़ के रिएजेंट और उपकरण खरीदी घोटाले के मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की टीम ने यह कार्रवाई की है।

आरोपी को स्पेशल कोर्ट में पेश करने के बाद सात दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है। शशांक चोपड़ा को दो दिनों से ईओडब्ल्यू कार्यालय बुलाकर पूछताछ की जा रही थी। दस्तावेजों के अनुसार, दुर्ग की कंपनी मोक्षित कॉर्पोरेशन दवा, मेडिकल उपकरण निर्माता व सप्लायर एजेंसी है।


यह एजेंसी 2015 से उपकरण सप्लाई कर रही है। ईओडब्ल्यू ने सोमवार को रायपुर और दुर्ग स्थित फैक्ट्री व घरों में छापा मारा था। हरियाणा के पंचकूला में आठ टीमों ने छापा मारा था।

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गड़बड़ी को लेकर विधानसभा में भी उठ चुका है मामला

मोक्षित कॉर्पोरेशन की रिएजेंट और मशीन आपूर्ति कराने में गड़बड़ी का मामला विधानसभा में भी उठा था। कंपनी के खिलाफ पांच वर्षों में 660 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी करने के आरोप हैं।

आरोप है कि कंपनी ने मार्केट दर से सौ गुना ज्यादा में उपलब्ध कराने का काम किया है। जिन स्वास्थ्य केंद्रों में रिएजेंट संरक्षित कर रखने की जगह नहीं थी, वहां भी सप्लाई कर दी गई। इसके चलते 20 करोड़ के रिएजेंट खराब हो गए।

इसलिए एक माह में हुई थी खरीदारी

दवा निगम में हुए रिएजेंट और उपकरण खरीदी घोटाले में अहम तथ्य सामने आए है। पिछली सरकार में हुई खरीदी के दौरान अधिकारियों को पहले ही पता चल गया था कि सरकार बदलने वाली है। इसी वजह से 15 मई 2023 से 17 जून 2023 के बीच 411 करोड़ रुपये के रिऐजेंट की खरीदी की गई।

वहीं, डीएचएस द्वारा सीजीएमएससी को भेज गए मांग पत्र में स्पष्ट लिखा गया था कि छह से आठ माह में किस्तों में क्रय आदेश जारी किया जाए। अधिकारियों को भरोसा था कि बिना बजट के खरीदी तो कर ली गई है, लेकिन खरीदी के बाद भी आचार संहिता लगने से पहले शासन से बजट मिल जाएगा।

बतादें कि सीजीएमएससी के टेंडर क्रमांक 182 के लिए जांच चल रही है। इसमें बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल किया गया है। सूत्रों के अनुसार, डीएचएस के लिए पांच फीसदी कमीशन, सीजीएमएससी एमडी 10 प्रतिशत, तकनीकी प्रबंधक पांच और इसके अलावा अलग से विभागीय नेता व अन्य अधिकारियों के लिए 25 प्रतिशत कमीशन तय किया गया था।

क्रय समिति की गलतियों से हुआ घोटाला

सीजीएमएससी और डीएचएस ने किसी भी तरह की दवा व उपकरण खरीदी के लिए छह से आठ विशेषज्ञों की क्रय समिति बनाई थी। इस समिति में जीएम टेक्निकल कमल पाटनावर, बायोमेडिकल इंजीनयर खिरौद्र रौतिया, टीपीओ अभिमन्यु सिंह, डीएचएस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अनिल परसाई, सीजीएमएससी के एमडी चंद्रकांत वर्मा और मेडिकल कालेज के एक डाक्टर को शामिल किया गया था।

रिएजेंट की दर अनुबंध करने वाली क्रय समिति में शामिल अधिकारियों ने दर स्वीकृत कर सप्लायर से अनुबंध करने के लिए डीएचएच को पत्र भेजा था। इसके बाद डीएचएस ने खरीदी की अनुमति दी थी। तब सीजीएमएससी ने टेंडर जारी किया।

घोटाले के लिए क्रय समिति की छह मनमानी

  • स्वास्थ्य केंद्रों में स्टोरेज क्षमता और टेक्नीशियन की उपलब्धता के बिना क्रय आदेश जारी किया गया।
  • डीएचएस और सीजीएमएससी के छह विशेषज्ञों को क्रय समिति में रखा गया था, जिन्होंने दर अनुबंध करने की स्वीकृति दी।
  • क्रय समिति अन्य राज्य के दवा निगम व बाजार में उपलब्ध रिएजेंट और एल-1 आए दर की तुलना करके ही अनुबंधन की स्वीकृति देती है।
  • दूसरे राज्य के दवा निगम में क्रय की जाने वाली उपकरण या दवा की कीमत कम मिलने पर क्रय समिति को एल-वन सप्लायर से मोलभाव करके दर कम करने की मांग करने का अधिकार होता है।
  • डीएचएस द्वारा भेजे गए रिएजेंट के मांग पत्र में साफ लिखा था कि छह से आठ माह का स्टाक का इंडेट है। इस आधार पर स्वास्थ्य केंद्रों की मांग के हिसाब से ही क्रय आदेश जारी किया जाए, लेकिन सीजीएमएससी के अधिकारियों ने 26 दिन के अंतराल में पूरी खरीदी का क्रय आदेश जारी कर दिया।
  • डीएचएस के भेजे गए इंडेट के लिए सीजीएमएससी द्वारा शासन से वित्तीय अनुमोदन नहीं लिया गया।