
रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के 132 केवी और 220 केवी के सब स्टेशनों को चलाने के लिए जिस निविदा के आधार पर काम दिया जा रहा है, वह लगातार विवादों में है। बताया जाता है कि एक बार फिर 132 केवी और 220 केवी सब स्टेशनों की निविदा 71 और 72 में पहले की तरह जेवीएस मुंबई व इफेक्टिव इंटरप्राइजेस कंपनी ने लोएस्ट हासिल किया है। मामले में कंपनी के चेयरमैन को शिकायत की गई है। आरोप है कि मानव संसाधन के काम में प्राफिट रेसियो को आपस में सेटिंग करके डाला गया है।
करीब 2,500 से 3,000 रुपये प्रति कर्मी में प्रोफिट लाभांश को निविदा अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया है और इसमें जनरल मैनेजर फाइनेंस यानी वित्त को नेगोशिएशन नहीं किया गया है। बाकी निविदाओं की तरह इसमें कोई सीलिंग रेट तय नहीं है। शिकायत है कि जिन्हें काम दिया जा रहा है, वे पूर्व टेंडर के अंडर टेकिंग में लेबर लाइसेंस, जो कि हर जिले के अलग-अलग प्रक्रिया में अपनाई जाती है, समय पर जमा नहीं किए थे।
किसी ने भी जिम्मेदारी से राज्य सरकार को टैक्स नहीं पटाया। समय पर बैंक गारंटी तक नहीं दी। इसके बाद कंपनी ने निविदा भरने के लिए पुराने नियम को ही लागू कर दिया। इससे सालों से जो कंपनियां काम कर रही हैं, उनके अलावा राज्य की अन्य किसी कंपनी को काम नहीं मिल पाया। बताया जाता है कि सुरक्षा निधि भी आदेश, अनुबंध हैंड ओवर के साथ जमा करने का नियम है, किसी ने नहीं जमा की। बीजी की फार्मेलिटी भी नहीं हुई और पेनाल्टी तक नहीं वसूली गई।
अनुबंध का खुला उल्लंघन
चेयरमैन को की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अनुबंध का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। बैंक ब्याज की राशि भी ठेकेदारों से नहीं वसूली जा रही है। एलओआइ में पूर्ण जानकारी का अभाव है, हैंडओवर बैंक गारंटी, लेबर जमा नहीं होना नियमों के खिलाफ हैं। मामले की जांच की मांग की जा रही है।
शुरू से ही चल रहा है विवाद
132 केवी और 220 केवी के सब स्टेशनों को चलाने के लिए जारी निविदा को लेकर शुरू से ही विवाद चल रहा है। छत्तीसगढ़ संपूर्ण विद्युत ठेकेदार महासंघ दुर्ग ने चेयरमैन को शिकायत की थी। इसमें सीधे आरोप लगाया गया था कि मैन पावर कार्य की निविदा में अनियमिताओं से करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है। आउट सोर्सिंग के जरिए सब स्टेशनों के काम कराने के लिए निविदा की शर्तें पहले से कार्य कर रहे ठेकेदारों के मापदंड पर बनाए गए हैं, ताकि उन्हीं की मोनोपाली चल सके।
अधिक दर पर कार्य कराकर करोड़ों रुपये की अनिमितता की जा रही है। बताया जाता है कि पिछले 12 साल से विभाग में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य अभियंता आरसी अग्रवाल एक ही जगह पर पदस्थ हैं और वे ही नियमों को बना रहे हैं।
वर्जन
सीलिंग रेट तय नहीं होने से कोई दिक्कत नहीं है, जहां तक तकनीकी रूप से गड़बड़ी की बात कर रहे हैं, यह शिकायत अभी नहीं मिली है।
- अंकित आनंद, चेयरमैन, राज्य विद्युत कंपनी
लेबर लाइसेंस और बैंक गारंटी की शिकायत का मामला पुरानी निविदा का है, अभी तो प्रक्रिया चल रही है, मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जाएगी।
- संजय तेलंग, एमडी, स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी, रायपुर
इस मामले में मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं बयान देने के लिए सक्षम अधिकारी नहीं हूं।
- महेंद्र चौहान, ईडी, विद्युत कंपनी