संदीप तिवारी, रायपुर। Double Standard For Vaccination: छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की नौकरी करने वाले कर्मचारी-अधिकारी अभी प्राथमिकता वाले कोरोना वैक्सीन से वंचित हो गए हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्रीय संस्थानों के कर्मचारियों और अधिकारियों को कोरोना टीका लगाने के मामले में फ्रंटलाइन वर्कर मानने से इन्कार कर दिया है। सरकार केवल राज्य सरकार से संबद्ध संस्थानों के कर्मचारियों-अधिकारियों को ही फ्रंटलाइन वर्कर मान रही है।

इसकी वजह से अकेले राजधानी में कई केंद्रीय संस्थान हैं, जिनके कर्मचारी-अधिकारी फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी से बाहर हैं। इनमें रेलवे, डाक विभाग, भारतीय संचार विभाग, हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी (सीपेट), इंडियन इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट संस्थान (आईआईएम), केंद्रीय आयकर विभाग, केंद्रीय सर्वेक्षण संस्थान जैस कई संस्थान हैं।

रायपुर में ही 10 हजार से अधिक कर्मचारी-अधिकारी इस लाभ से वंचित हो गए हैं। प्रदेशभर में इनकी संख्या हजारों में है। यद्यपि इनमें 50 फीसद से अधिक कर्मचारी प्रदेश के ही मूल निवासी हैं। ये कर्मचारी-अधिकारी टीका लगवाने के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि निजी अस्पतालों में भी टीका उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रीय प्राद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) रायपुर से कई लेक्चरार-प्रोफेसर भी टीकाकरण केंद्रों पर सुबह चार बजे पहुंच गए थे, परंतु नौ बजे बारी आने पर उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।

कइ लोगों के आधार कार्ड में प्रदेश के बाहर का पता होने पर भी टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। मामले में दोहरी व्यवस्था से केंद्रीय कर्मचारियों में भारी रोष है। टीकाकरण केंद्रों पर आए दिन विवाद खड़ा हो रहा है। कई प्रोफेसरों को बुधवार को भी बैरंग लौटा दिया गया है। मामले में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (आइआइटी) के डायरेक्टर डॉ. रजत मूणा ने कहा कि हम केंद्र सरकार से पत्र लिखकर अपने कर्मचारियों के लिए व्यवस्था करने की मांग करेंगे।

सरकार ने इन्हें माना है फ्रंटलाइन वर्कर

राज्य सरकार ने जिन्हें फ्रंटलाइन वर्कर माना है, उनमें राज्य के सरकारी कर्मचारी और राज्य से संबंधित व अर्द्धशासकीय संस्थाओं के कर्मी, अंत्योदय व बीपीएल राशनकार्डधारी, भोजन परोसने वाले और सब्जी बेचने वाले, बस, ट्रक के ड्राइवर व कंडक्टर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, पंचायत सचिव व कर्मी, पीडीएस दुकान प्रबंधक व विक्रेता, इंस्टीट्यूशनल केयर की महिलाएं, गांव के कोटवार, पटेल, वृद्धाश्रम के लोग व कर्मी, महिला व बाल देखभाल केंद्रों के कर्मी, श्मशान या कब्रिस्तान में कार्यरत लोग, दिव्यांग, कोरोना ड्यूटी पर लगे लोग, वकील, पत्रकार, बंदी और गंभीर बीमारियों के मरीज शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने कहा है कि अन्य निजी और सरकारी संस्थाएं खुद वैक्सीन खरीदकर अपने कर्मियों को लगाएंगी। जो लोग केंद्रीय संस्थानों में कार्यरत हैं और छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी उनके पास एपीएल कार्ड है, वे इसके आधार पर वैक्सीन लगवा सकते हैं। फिलहाल केंद्र के कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी में नहीं रखा गया है। हालांकि, हमने कहा है कि कलेक्टर चाहें तो वे और लोगों को भी जोड़ सकते हैं।

- टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़

Posted By: Shashank.bajpai

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