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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की 'व्यवस्था बीमार'...मरीज अपने हाथ में यूरिन बैग लेकर भटकने को मजबूर

राजधानी रायपुर के डॉ. आंबेडकर अस्पताल में बदहाल व्यवस्था के कारण ईलाज करवाने आए मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीजों को व...और पढ़ें

By Roman TiwariEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Sun, 13 Jul 2025 08:07:47 AM (IST)Updated Date: Sun, 13 Jul 2025 08:08:25 AM (IST)
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की 'व्यवस्था बीमार'...मरीज अपने हाथ में यूरिन बैग लेकर भटकने को मजबूर
डॉ. आंबेडकर अस्पताल में अव्यवस्था

HighLights

  1. डॉ. आंबेडकर अस्पताल में बदहाल व्यवस्था
  2. वार्डबाय या सहायक कर्मचारी की सुविधा नहीं
  3. मरीज के परिजन खुद खींच रहे व्हीलचेयर

राजकुमार मधुकर,नईदुनिया, रायपुर: डॉ. आंबेडकर अस्पताल, यह प्रदेश का सबसे बड़ा और सबसे अधिक भरोसेमंद सरकारी अस्पताल माना जाता है। यहां की व्यवस्था एक तस्वीर ने पूरी तरह बेनकाब कर दी। तस्वीर में एक मरीज, जिसके शरीर में यूरिन पाइप जुड़ा हुआ है, खुद अपने हाथों में यूरिन बैग और दवाइयों का थैला लिए अस्पताल परिसर में अकेले खड़ा है।

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न कोई व्हीलचेयर, न स्ट्रेचर, न कोई वार्डबाय या सहायक कर्मचारी। ये दृश्य सिर्फ एक मरीज की व्यथा नहीं है, ये उस पूरे सिस्टम की कलई खोल रहा है जो मुफ्त इलाज और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य सेवा के बड़े-बड़े दावे करता है।


रोजाना तीन हजार मरीजों का ओपीडी में उपचार

आंबेडकर अस्पताल में रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं और सैकड़ों को भर्ती किया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के आने के बावजूद अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ नहीं, स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं और जो है भी, वो अक्सर अनुपलब्ध रहता है या मरीजों के स्वजनों को खुद खींचना पड़ता है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। स्ट्रेचर-बाय, वार्ड-बाय, नर्सिंग स्टाफ और अटेंडेंट की भारी कमी से मरीज बेहाल हैं। कई बार मरीजों को खुद अपनी स्थिति संभालते देखा जाता है, जैसे कि इस तस्वीर में साफ नजर आ रहा है।

ग्रामीण इलाके से आते हैं अधिकतर मरीज

यदि राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में यह हाल है, तो फिर दूर-दराज के अस्पतालों में स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। सरकार को इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए और मरीजों की गरिमा व सुरक्षा के लिए व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करनी चाहिए।

शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं

मरीज के स्वजन का कहना है कि उन्हें वार्ड तक मरीज को पहुंचाने में घंटों इंतजार करना पड़ता है। कोई मदद नहीं मिलती। शिकायत करने पर या तो टालमटोल होता है या जवाब मिलता है और मरीज भी हैं, इंतजार करो। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की अमानवीयता करार देते हुए कहा है कि आंबेडकर अस्पताल को तत्काल प्रशासनिक सुधार की जरूरत है।

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जिम्मेदार बोलें- प्रयास किया जा रहा

वहीं इस बदहाली के हाल को लेकर जब जिम्मेदारों से सवाल किया गया, तो उनका कहना है कि प्रयास किया जा रहा है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सिर्फ प्रयास किया जाना चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

इस संबंध में डॉ. आंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर का कहना है कि मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है, मरीज कौनसे वार्ड में भर्ती है उसकी जानकारी मंगाई गई है।