
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पर्चा लीक मामले की जांच अब और तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस बहुचर्चित मामले में शिकंजा कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन ओएसडी चेतन बोरघरिया से जुड़े लगभग 15 संदेहियों को पूछताछ के लिए तलब किया है। एजेंसी के इस कदम से राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।
पूर्व ओएसडी चेतन बोरघरिया को बलरामपुर से गिरफ्तार करने के बाद ईडी की रिमांड पर रखा गया था। रिमांड अवधि पूरी होने पर बुधवार को अदालत के निर्देश के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है। एजेंसी की पूछताछ के दौरान बोरघरिया से कथित आर्थिक लेनदेन और पीएससी की चयन प्रक्रिया से जुड़े कई अहम पहलुओं पर पूछताछ की गई। अब उनके करीबियों और कुछ अभ्यर्थियों से पूछताछ कर कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
जांच के दायरे में मुख्य रूप से विकास चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर के माध्यम से रकम पहुंचाए जाने के आरोप हैं। इससे जुड़े अभ्यर्थियों समेत करीब 15 लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पर्चा उपलब्ध कराने और चयन में मदद के नाम पर जुटाई गई राशि का अंतिम लाभार्थी कौन था और यह पैसा किन रास्तों से होकर गुजरा।
इससे पहले ईडी ने चेतन बोरघरिया के धमतरी स्थित पैतृक निवास पर छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे। 2019 से 2023 के बीच की कॉल डिटेल और डिजिटल चैट का विश्लेषण करने पर पैसों के लेन-देन और इंटरव्यू में मदद से जुड़े कई पुख्ता संकेत मिले हैं। लगभग 3.2 करोड़ रुपये के इन संदिग्ध लेन-देन की चैट को आधार बनाकर ही अब संदेहियों से पूछताछ की जा रही है।
इस घोटाले की जांच का दायरा अब केवल राज्य सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है। ईडी ने वर्ष 2020-21 के दौरान आयोजित राज्य अभियांत्रिकी सेवा, सहायक प्राध्यापक, सिविल जज, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और वन सेवा जैसी अन्य परीक्षाओं के रिकॉर्ड भी खंगालने शुरू कर दिए हैं। डिजिटल साक्ष्यों, बयानों और चयनित अभ्यर्थियों की पोस्टिंग के बीच तालमेल बैठाकर एजेंसी इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में जुटी है।