
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके की एक अलग तस्वीर सामने रखी है। ईडी के अनुसार में दावा किया है कि इस नेटवर्क में करीब 25 से 30 अभ्यर्थियों से कुल 3.13 करोड़ रुपये जुटाए गए।
डिप्टी कलेक्टर से लेकर राजपत्रित अधिकारियों के अलग-अलग पदों की पैकेज कीमत 50 लाख रुपये तक लगाई गई थी। पूरा घोटाला पैकेज के तौर पर किया गया था। कुछ अभ्यर्थियों से लाखों रुपये अग्रिम लेने और चयन नहीं होने पर रकम लौटाने के लिए समझौते किए जाने का भी उल्लेख है।
ईडी ने इस रकम में से 30 लाख रुपये वापस किए जाने के बाद शेष 2.83 करोड़ रुपये को अपराध से अर्जित आय की गणना में शामिल किया है। इसके अलावा ग्रामीण विकास समिति को मिले 45 लाख रुपये के सीएसआर फंड को भी अपराध से अर्जित आय की एक अलग कड़ी बताया गया है। इस तरह ईडी ने कुल 3.28 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय चिन्हित करने का दावा किया है।
ईडी ने आरोपपत्र में अंकित चंद्राकर के बयान का उल्लेख है। जनवरी 2022 में उन्हें पांच लाख रुपये एडवांस की जानकारी दी गई थी। इसमें एक लाख रुपये बिचौलिये के पास रखने थे। चार लाख रुपये आगे देने थे। इसके बाद डा. विकास चंद्राकर के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया। शुरुआत में सात-आठ अभ्यर्थियों की बात सामने आई। बाद में यह संख्या 25 से 30 तक पहुंचने का दावा है। ईडी के अनुसार डा. विकास चंद्राकर ने रकम जुटाई। यह पैसा अलग-अलग मौकों पर अनिल चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर तक पहुंचाया गया।
मुख्य परीक्षा से करीब 15 दिन पहले अभ्यर्थियों को बरनवापारा के रिसार्ट में भेजे जाने का उल्लेख है। ईडी के अनुसार करीब 25 अभ्यर्थी वहां पांच दिन रुके। आरोप है कि उन्हें प्रश्न उपलब्ध कराए गए। परीक्षा की तैयारी भी कराई गई। धर्मेंद्र साहू के बयान में भी रिसार्ट का उल्लेख है। उनके अनुसार उन्हें अभ्यर्थियों को पढ़ाने के लिए लगाया गया था। बाद में अभ्यर्थियों को रायपुर के होटल में लाने की बात कही गई। परीक्षा के लिए आने-जाने की व्यवस्था का भी जिक्र है।
कमलेश सिंह राजपूत के बयान में 50 लाख रुपये के पैकेज का उल्लेख है। आरोप है कि उनकी बेटी, दामाद और भतीजे को राजपत्रित पद दिलाने का भरोसा दिया गया। फरवरी से मई 2022 के बीच पांच किस्तों में 30 लाख रुपये नकद दिए गए। तीनों का चयन नहीं हुआ। इसके बाद रकम वापसी की मांग शुरू हुई। शिकायत के अनुसार डा. विकास चंद्राकर ने कमलेश का परिचय उत्कर्ष चंद्राकर से कराया। उन्हें बताया गया कि 30 लाख रुपये उत्कर्ष को दिए गए थे। आगे यह रकम चेतन बोरघरिया तक पहुंचने की बात कही गई।
ईडी ने अंकित चंद्राकर के बयान के आधार पर 3.13 करोड़ रुपये जुटाने का दावा किया है। इसमें से 30 लाख रुपये लौटाए गए। बाकी 2.83 करोड़ रुपये की वापसी के लिए 21 फरवरी 2025 को समझौता हुआ। ईडी ने इस दस्तावेज को मनी ट्रेल की महत्वपूर्ण कड़ी बताया है।
जांच में जमीन के सौदे का भी उल्लेख है। दो जनवरी 2025 के बिरकोनी भूमि समझौते में 20 लाख रुपये की राशि का जिक्र है। ईडी के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर और कमलेश सिंह राजपूत के बीच जमीन बिक्री का समझौता हुआ था। कमलेश के बयान के मुताबिक इसका उद्देश्य पहले दिए गए पैसे की वापसी सुनिश्चित करना था। इस तरह जांच का दायरा केवल परीक्षा तक नहीं रहा। बाद के लेन-देन और रकम की वापसी के प्रयास भी जांच में शामिल किए गए।
ग्रामीण विकास समिति को श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड से 20 और 25 लाख रुपये की दो किस्तों में 45 लाख रुपये मिले थे। ईडी ने इसे अलग वित्तीय कड़ी बताया है। समिति की अध्यक्ष डा. पद्मिनी सिंह सोनवानी थीं। ललित गणवीर कोषाध्यक्ष थे। उस समय गणवीर सीजीपीएससी में उप परीक्षा नियंत्रक भी थे। ईडी के अनुसार समिति को सीएसआर राशि दिलाने की प्रक्रिया में टामन सिंह सोनवानी की भूमिका की जांच हुई। सोनवानी ने 45 लाख रुपये मिलने की बात स्वीकार की है।
ईडी ने उत्कर्ष चंद्राकर के खाते में 72.18 लाख रुपये के नकद जमा की जांच की। चेतन बोरघरिया से जुड़े खातों में 71.15 लाख रुपये जमा होने का भी उल्लेख है। तलाशी में कुल 9.32 लाख रुपये नकद मिलने की बात शिकायत में है। मोबाइल, एसएसडी, बैंक खाते और समझौते भी जांच का हिस्सा हैं। ईडी ने 21 सितंबर को छह संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं। इनकी कीमत 47.54 लाख रुपये बताई गई है।