हीमोफीलिया बीमारी को लेकर एक्सपर्ट्स ने किया लोगों को जागरूक, इलाज को लेकर दी ये जानकारी
हीमोफिलिया रक्त की एक दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी है। इसमें रक्त का थक्का बनाने में आवश्यक फैक्टर-8 या फैक्टर-9 की कमी होती है।
By Ashish Kumar Gupta
Edited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Fri, 13 May 2022 01:52:12 PM (IST)
Updated Date: Fri, 13 May 2022 01:52:12 PM (IST)
heamopilia रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में हीमोफीलिया बीमारी के चिकित्सकीय पहलुओं पर वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें बीमारी और उसके इलाज को लेकर जागरूक किया गया।
मेडिसिन विशेषज्ञ डा. आरएल खरे ने बताया कि हीमोफिलिया रक्त की एक दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी है। इसमें रक्त का थक्का बनाने में आवश्यक फैक्टर-8 या फैक्टर-9 की कमी होती है। इससे रक्त का थक्का नहीं बन पाता। इस कारण बार-बार रक्तस्राव होने लगता है। विभिन्न जोड़ों में रक्तस्राव के कारण विकृति आती है आंतरिक महत्वपूर्ण अंगों में रक्तस्राव मृत्यु का कारण भी बनता है।
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. देवप्रिया लकरा, पैथालाजी विभागाध्यक्ष डा. अरविंद नेरल, डा. राबिया परवीन सिद्दीकी, डीकेएस सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के हिमेटोलाजिस्ट डा. अंबर गर्ग ने अपने व्याख्यान में बचाव के लिए फैक्टर-8 और फैक्टर-9 कितनी मात्रा में और कितने अंतराल में दिया जाना है, इसकी विवेचना की। चिकित्सकों ने बताया कि नई दवाओं से हीमोफिलिया के मरीजों के अच्छे, स्वस्थ और लंबे जीवन की आशा की किरण नजर आती है।
शासकीय आयुर्वेदिक अस्पतालों में निश्शुल्क विशेष ओपीडी आज
प्रदेश के शासकीय आयुर्वेदिक अस्पतालों में एक अप्रैल 2022 से प्रत्येक शुक्रवार को विशेष मानसिक स्वास्थ्य ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। आयुष संचालनालय के सहायक संचालक डा. विजय साहू ने बताया कि विशेष ओपीडी में मानसिक समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को आयुर्वेद के माध्यम से उपचार और स्वस्थ जीवन शैली संबंधी मार्गदर्शन दिया जाता है। आवश्यकता अनुसार मरीजों को पंचकर्म सेवा भी दी जाती है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय चिकित्सालय रायपुर और बिलासपुर में 13 मई को भी ओपीडी संचालित कर मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित मरीजों की मुफ्त जांच और उपचार किया जाएगा।