रायपुर में फर्जी पीएसओ ने युवक को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर दस लाख ठगे, सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज
छत्तीसगढ़ के रायपुर में सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवक से दस लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित ने सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज कराया।
Publish Date: Wed, 28 Oct 2026 03:41:51 PM (IST)Updated Date: Wed, 28 Oct 2026 03:44:15 PM (IST)
पुलिस कार्रवाई की प्रतीकात्मक तस्वीर। - अर्काइवHighLights
- परिवहन आरक्षक पद के लिए मांगे बीस लाख
- खुद को पीएसओ बताकर युवक से की धोखाधड़ी
- सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ धोखाधड़ी मामला
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को ठगने का गंभीर मामला सामने आया है। जालसाज ने खुद को मंत्रियों का पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) बताकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवक को परिवहन आरक्षक बनाने का झांसा दिया और उससे 10 लाख रुपये ऐंठ लिए।
लंबे समय तक नियुक्ति न मिलने और पैसे वापस मांगने पर आरोपी द्वारा टालमटोल किए जाने के बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित की शिकायत पर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने नामजद आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सामाजिक कार्यक्रम में मुलाकात और रसूख का झूठा जाल
पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, कबीरधाम जिले के ग्राम सिंघनपुरी निवासी राजू बंजारे लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उसकी मुलाकात संजय लहरी नामक व्यक्ति से हुई। बातचीत के दौरान राजू ने जब उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की जानकारी दी, तो संजय ने खुद को मंत्रियों व आला अफसरों का पीएसओ बताते हुए अपना गहरा रसूख होने का दावा किया। आरोपी ने युवक को झांसे में लेते हुए कहा कि वह पहले भी कई लोगों की सरकारी नियुक्ति करवा चुका है और उसकी भी नौकरी पक्की करवा देगा।
20 लाख में सौदा तय, किस्तों में वसूले 10 लाख रुपये
आरोपी के झांसे में आकर पीड़ित ने परिवहन विभाग में आरक्षक पद पर भर्ती कराने की बात की। इसके एवज में संजय लहरी ने 20 लाख रुपये की मांग रखी। तय सौदे के मुताबिक, 10 लाख रुपये अग्रिम (एडवांस) और बाकी 10 लाख रुपये नियुक्ति पत्र मिलने के बाद देने की सहमति बनी। इसके बाद मई के महीने में अलग-अलग किस्तों में रकम का भुगतान किया गया। छह और सात मई के आसपास सर्किट हाउस के पास आरोपी को पांच लाख रुपये नकद दिए गए। इसके बाद 15 मई को ढाई लाख, 20 मई को दो लाख तीस हजार रुपये नकद और शेष 20 हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से ट्रांसफर किए गए।
नौकरी नहीं मिली तो शुरू हुआ टालमटोल, अन्य पीड़ितों के भी नाम
रकम लेने के बाद जब नियुक्ति में देरी होने लगी, तो पीड़ित ने आरोपी से संपर्क साधा। आरोपी आजकल में काम हो जाने का झूठा दिलासा देकर मामले को टालता रहा। काफी समय बीतने के बाद पीड़ित को ठगी का संदेह हुआ और उसने आरोपी के बारे में पड़ताल की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संजय लहरी ने केवल राजू से ही नहीं, बल्कि रत्ना साहू, फातिमा कुरैशी, प्रियंका साहू और मोहम्मद आरिफ खान समेत अन्य युवाओं से भी नौकरी के नाम पर मोटी रकम हड़पी है। पुलिस अब आरोपी की तलाश और मामले से जुड़े अन्य पीड़ितों के बयानों की जांच कर रही है।