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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Fasal Bazar App Explainer : 'फसल बाजार' एप से बिचौलियों की छुट्टी, किसानों को मिल रहा सीधा लाभ… पढ़िए Success Story

Fasal Bazar App Explainer: खबर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम परसाडीह के कुलदीप पटेल ने यह ऐप तैयार किया है। इस एप ...और पढ़ें

By Manish MishraEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Tue, 08 Jul 2025 01:12:25 PM (IST)Updated Date: Tue, 08 Jul 2025 01:12:48 PM (IST)
Fasal Bazar App Explainer : 'फसल बाजार' एप से बिचौलियों की छुट्टी, किसानों को मिल रहा सीधा लाभ… पढ़िए Success Story
कुलदीप पटेल और उनका बनाया एप। (फोटो- नईदुनिया)

HighLights

  1. कृषि विश्वविद्यालय से एमएससी एग्रोनामी की डिग्री लेने के बाद कुलदीप पटेल ने बनाया एप
  2. कुलदीप ने खुद महसूस की समस्या, फिर तकनीक की मदद से निकाला समाधान
  3. फसल को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने के नवाचार से किसानों को लाभ, मिल रहा अच्छा दाम

मनीष मिश्रा, नईदुनिया, रायपुर, Fasal Bazar App। अब किसानों को अपनी उपज बिचौलियों को औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी नहीं होगी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से तैयार किए गए 'फसल बाजार' एप ने इस समस्या का समाधान कर दिया है।

यह एप किसानों को सीधे ग्राहकों से जोड़कर उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाने में मदद कर रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है। इस नवाचार के पीछे एमएससी एग्रोनामी के छात्र रहे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम परसाडीह के कुलदीप पटेल का हाथ है।


कुलदीप ने बताई Fasal Bazar App की पूरी कहानी

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  • कुलदीप बताते हैं कि गांव से जुड़े होने के कारण किसानों की परेशानी पता थी। बिचौलिए की वजह से किसानों को अपनी फसल की अच्छी कीमत नहीं मिल पाती थी। यही से वर्ष 2018 में उन्हें फसल बाजार एप का विचार आया।
  • इस एप के बारे में किसानों को जागरूक किया। किसान अपनी फसल को एप पर अपलोड कर देते हैं। ग्राहक एप के माध्यम से सीधे किसान से खरीद लेता है। ग्राहक तक उत्पाद पहुंचाने के लिए रायगढ़, रायपुर, बिलासपुर, जशपुर, कोरबा आदि जिलों में 48 किसान सेंटर बनाए है।

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  • एक सेंटर 10 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करता है। ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार जिस किसान सेंटर में उत्पाद उपलब्ध हैं, वहां से ग्राहक को सीधे दिया जाता है। किसान सेंटर स्थापित करने का खर्च कंपनी उठाती है।
  • कुलदीप पटेल को अब तक इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर से 30 लाख रुपये का अनुदान मिल चुका है। फसल किसान बाजार को वर्ष 2022 में पुरस्कार भी मिल चुका है। कुलदीप को किसान बाजार एप का प्रजेंटेशन देने के लिए 11 जुलाई को केंद्रीय कृषि मंत्रालय में आमंत्रित किया गया है।

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(किसानों से सीधे फसल लेकर जाते हुए सेंटर के प्रतिनिधि।)

एप से 4500 रुपये क्विंटल मिल रहा कोदो का दाम

परसाडीह गांव के किसान श्याम कुमार पटेल ने बताया कि उनकी कोदो की फसल को बिचौलियों के माध्यम से 2500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता था। अब बाजार एप से 4500 रुपये क्विंटल की कीमत मिल रही है। वे कोदो कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा, कंगनी, हरी कंगनी, प्रोसो मिलेट आदि की खेती करते हैं।

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(किसान श्याम पटेल)

फसल बाजार एप से गजेंद्र चंद्रकार को मिला फायदा

धमतरी जिले के कुरुद ब्लाक के ग्राम परसवानी के किसान गजेंद्र चंद्रकार पिछले चार वर्ष से इस एप से जुड़े हैं। वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। आज उनकी फसल पुणे, नासिक आदि शहरों में पहुंचने लगी है। वे 80 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रति किलो का चावल बेचते हैं। गजेंद्र बताते हैं कि एप पर किसान ही कीमत तय करता है। सर्विस चार्ज, डिलीवरी चार्ज मिलाकर हम कीमत तय करते हैं।

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(किसान गजेंद्र चंद्रकार)

50-60 किलो की पैकिंग में हम चावल भेजते हैं। ब्लैक, ग्रीन, रेड व सुगंधित चावल की खेती से उन्हें बहुत फायदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि एप ने कृषि को आसान और लाभकारी बना दिया है। किसान सेंटर ने किसानों को नई तकनीक से परिचित कराया है। साथ ही ट्रांसपोर्टिंग की सुविधाएं भी प्रदान करता है, जिससे फसल की सही कीमत पर डिलीवरी हो पाती है।

कैंसर रोधी व शुगर फ्री चावल को मिल रहा उचित दाम

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की बरमकेला तहसील के ग्राम नवापाली के किसान मुकेश चौधरी के पास स्वयं की 20 एकड़ जमीन है। वे फसल एप, किसान सेंटर से जानकारी लेकर औषधि चावल की खेती कर रहे हैं। उन्हें एप से कैंसर रोधी व शुगर फ्री चावल बेचने पर अच्छा फायदा मिल रहा है।

वे 100 से लेकर 120 रुपये प्रति किलो में चावल बेचते हैं। 'फसल बाजार' एप से उन्हें अपनी विशेष फसलों के सही मूल्य की जानकारी मिलती है। बिना बिचौलियों के सीधे बाजार में फसल बेचने से उनकी आय में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहन और 'गंवई' स्टोर

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(मिलेट्स सेंटर)

कुलदीप 'फसल बाजार' एप के साथ-साथ मिलेट्स की खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने स्वयं सब्जी और पारंपरिक चावलों की खेती के बाद मिलेट्स को चुना। कुलदीप किसानों को मिलेट्स की कम लागत और कम पानी की आवश्यकता के बारे में बताकर उन्हें कोदो, कुटकी, रागी, और बाजरा जैसी फसलें उगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 2020 में 60 एकड़ से शुरू हुई यह पहल पिछले साल 2,360 एकड़ तक पहुंच गई और इस साल 3,000 एकड़ का लक्ष्य है।

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(पैकेजिंग प्लांट)

दुकानों से टाइअप, ऑनलाइन भी मिल रहे उत्पाद

किसानों के मिलेट्स उत्पादों को बेचने के लिए कुलदीप ने रायपुर में 'गंवई' नाम से तीन स्टोर खोले हैं। इसके साथ ही रायपुर में 35 और दुर्ग-भिलाई में 12 दुकानों से भी टाइअप किया है। उनके उत्पाद आनलाइन अमेजान, फ्लिपकार्ट, मिशो में भी उपलब्ध हैं, जहा ग्राहक मिलेट्स कुकीज, चिक्की, लड्डू और अन्य उत्पाद आर्डर कर सकते हैं।

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(उत्पाद तैयार करतीं स्व सहायता समूह की महिलाएं।)

यह पहल 50 से अधिक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को भी सशक्त कर रही है, जिनके हस्तनिर्मित उत्पाद इन स्टोर्स पर बेचे जाते हैं, जिससे ग्राहकों को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिलते हैं और महिलाओं को आय का जरिया। कंपनी का वार्षिक टर्नओवर साढ़े तीन करोड़ रुपये है, और इसमें 19 प्रत्यक्ष और 50 से अधिक अप्रत्यक्ष कर्मचारी जुड़े हैं।