छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी पर एक करोड़ तक लगेगा जुर्माना, नकल करते पकड़े जाने पर पांच साल जेल, पांच लाख जुर्माना
छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी (CGPSC) भर्ती घोटाले से सबक लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रही है।
Publish Date: Thu, 12 Mar 2026 12:25:11 PM (IST)Updated Date: Thu, 12 Mar 2026 12:27:51 PM (IST)
HighLights
- वर्तमान बजट सत्र में विधेयक लाएगी सरकार
- कोचिंग संस्थानों पर भी लगाम लगाएगी सरकार
- 2021–22 भर्ती घोटाले में हुआ था बड़ा खुलासा
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी (CGPSC) भर्ती घोटाले से सबक लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रही है। विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में जल्द ही सरकार "छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026" पेश करेगी।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस "गारंटी" को पूरा करने की दिशा में है, जिसमें उन्होंने परीक्षा सुधार का वादा किया था।
नकल करते पकड़े जाने पर पांच साल जेल, पांच लाख जुर्माना
नए कानून के तहत, भर्ती परीक्षाओं में नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षार्थी को एक से पांच साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। वहीं, यदि कोई गिरोह या व्यक्ति पेपर लीक या नकल कराने में शामिल पाया जाता है तो उसे कठोर कारावास के साथ एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना होगा।
कोचिंग संस्थानों पर भी लगेगी लगाम
विधेयक में कोचिंग संस्थानों के लिए भी सख्त नियम बनाए जा रहे हैं। अब कोई भी संस्थान चयन की "सौ प्रतिशत गारंटी" देकर युवाओं को प्रलोभन नहीं दे सकेगा। भ्रामक प्रचार या सफलता के झूठे दावे करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। सरकार का लक्ष्य भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर युवाओं का विश्वास बहाल करना है।
CGPSC 2021–22 भर्ती घोटाले में हुआ था बड़ा खुलासा
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021–22 भर्ती घोटाले में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ ता। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से कोर्ट में पेश की गई पूरक चार्जशीट और उसमें शामिल सरकारी गवाह के बयान से सामने आया था कि सोनवानी का कथित वसूली तंत्र एनजीओ से लेकर कोचिंग संस्थानों तक फैला हुआ था।
जांच में पहले यह तथ्य सामने आया था कि सोनवानी की पत्नी के एनजीओ जीवीएस में सीजीपीएससी के सहायक परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर कोषाध्यक्ष के रूप में जुड़े हुए थे। इसी एनजीओ के माध्यम से बजरंग पावर से 50 लाख रुपये की वसूली की गई थी। अब जांच में कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। आरोप है कि उत्कर्ष ने अभ्यर्थियों से करीब सवा करोड़ रुपये वसूले।