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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शिक्षा विभाग में 76 लाख की हेराफेरी, पूर्व डीईओ जीआर चंद्राकर के खिलाफ एफआईआर के आदेश

रायपुर के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जीआर चंद्राकर पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत 76 लाख रुपये की हेराफेरी का आरोप साबित हुआ है। राज्य ...और पढ़ें

By Ashish Kumar GuptaEdited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Fri, 22 Nov 2024 08:56:42 AM (IST)Updated Date: Fri, 22 Nov 2024 08:56:42 AM (IST)
शिक्षा विभाग में 76 लाख की हेराफेरी, पूर्व डीईओ जीआर चंद्राकर के खिलाफ एफआईआर के आदेश

HighLights

  1. रायपुर के पूर्व डीईओ जीआर चंद्राकर पर 76 लाख रुपये की गड़बड़ी।
  2. फर्जी और बंद स्कूलों के नाम पर धनराशि ट्रांसफर।
  3. तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला की भूमिका पर सवाल।

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्‍तीसगढ़ सरकार ने रायपुर के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) जीआर चंद्राकर के खिलाफ शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 76 लाख रुपये की हेराफेरी करने के मामले में एफआईआर के निर्देश दिए हैं। इसके लिए रायपुर डीईओ डा. विजय खंडेलवाल को तत्काल एफआईआर करने और इसकी जानकारी शासन को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नईदुनिया ने 22 फरवरी 2021 को 'शिक्षा विभाग डकार गया गरीब बच्चों के नाम पर 74 लाख रुपये' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति के तहत स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के निर्देश पर अवर सचिव आरपी वर्मा ने कार्रवाई करने के लिए निर्देश जारी किए हैं।


तीन बार जांच, पूर्व प्रमुख सचिव की भूमिका रही संदिग्ध

मामले में तीन बार जांच हुई थी और आरोप साबित हो गया था, इसके बाद भी स्कूल शिक्षा के पूर्व प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने मामले में कार्रवाई नहीं की थी। आरोपी अधिकारी को बचाने के मामले में पूर्व प्रमुख सचिव की भूमिका भी संदेह के दायरे में रही है।

इस तरह चली थी जांच

पहली जांच: पहली जांच तत्कालीन संयुक्त संचालक एसके भारद्धाज ने की थी। उन्होंने पाया था कि जिन लोगों के खाते में आरटीई की रकम भेजी गई थी, उनमें से कुछ स्कूल अस्तित्व में ही नहीं थे और कुछ वर्षों से बंद थे। सृष्टि पब्लिक स्कूल के नाम पर उपेंद्र चंद्राकर को 21 लाख 38 हजार 367 रुपये, सरस्वती शिशु मंदिर बेलदारसिवनी के नाम पर चंद्रिका अनंत के खाते में नौ लाख 80 हजार 578 स्पये रकम जारी हुई थी। इसी तरह ब्रृजेश कुमार पटेल, चंद्रकिशोर देवांगन, नीलेश्वर के नाम पर भी राशि भेजी गई थी।

दूसरी जांच: जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायपुर की ओर से जांच करके रिपोर्ट संचालनालय की ओर भेजी गई थी। इसमें स्पष्ट बताया गया था कि किस तरह जानबूझकर राशि दूसरों के खाते में अंतरित कराई गई है। यूको बैंक प्रबंधक की ओर से दी गई जानकारी में यह बात स्पष्ट हो चुकी है।

तीसरी जांच: तीसरी बार समग्र शिक्षा के तत्कालीन संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव ने जांच की थी। उन्होंने रिपोर्ट दी थी कि पूर्व डीईओ ने आरटीई का कार्यभार संभाल रहे सेक्शन अधिकारी और बाबू से बगैर कोई नोटशीट के ही भुगतान कराया था। 28 जनवरी, 2021 को डीईओ के खाते में 77 लाख 97 हजार 55 स्पये थे।

मामले में 29 जनवरी को 76 लाख 42 हजार 203 रुपये आठ निजी स्कूलों के नाम पर भेज दिया गया। मामले में डीईओ कार्यालय में इन रुपयों को जारी करने के लिए नोटशीट ही नहीं चलाई गई। इसके अलावा 2019-20 की करीब करोड़ 66 लाख रुपये साल 2020-21 में बांटी गई थी।