
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी में ठगों ने खुद को एटीएस, एनआइए और पुलिस अधिकारी बताकर शिक्षक को करीब तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। शिक्षक को बताया गया कि उनके आधार नंबर का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में बैंक खाता खोलने और मनी लांड्रिंग के लिए किया गया है।
उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने का डर दिखाकर ठगों ने पहले परिवार और संपत्ति की जानकारी जुटाई और फिर जांच के नाम पर 18 लाख रुपये आरटीजीएस करा लिए। रकम खाते में पहुंचने के बाद भी ठगों ने शिक्षक से बैंक पासबुक अपडेट कर उसकी फोटो वाट्सएप पर मंगाई। रेंज साइबर थाना पुलिस ने मामले में एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सड्डू के सेक्टर-6 हाउसिंग बोर्ड कालोनी निवासी शिक्षक अखिलेश कुमार मिश्र (60) ने पुलिस को बताया कि 24 सितंबर को स्कूल से छुट्टी के बाद वह घर पहुंचे थे। दोपहर करीब एक बजे उनके मोबाइल पर एक नंबर से काल आया। काल करने वाले ने खुद को नया रायपुर एटीएस कार्यालय का वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बताया। उसने शिक्षक से कहा कि उनके आधार नंबर से जम्मू-कश्मीर में बैंक खाता खोला गया है। इस खाते में मनी लांड्रिंग से जुड़ा मामला सामने आया है और लखनऊ एटीएस से उनके नाम का गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। ठग ने शिक्षक को तत्काल एटीएस कार्यालय आने को कहा। शिक्षक ने थकान का हवाला देकर तत्काल पहुंचने में असमर्थता जताई तो फोन करने वाले ने उन्हें दूसरे कथित अधिकारी से बात करा दी। उसने भी वही कहानी दोहराई और कहा कि उनके मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी को दे दी गई है।
कुछ देर बाद शिक्षक के मोबाइल पर वाट्सएप वीडियो काल आया। काल में पुलिस की वर्दी पहने करीब 25 से 30 वर्ष का युवक दिखाई दिया। कुछ देर बाद उसने अपना वीडियो बंद कर दिया, जबकि शिक्षक का वीडियो चालू रखा। इसके बाद ठगों ने शिक्षक से पूछताछ शुरू की। पहले उनके परिवार के बारे में जानकारी ली गई। शिक्षक से पूछा गया कि परिवार में कौन-कौन है, बच्चे कहां रहते हैं और क्या करते हैं। इसके बाद ठगों ने उनकी चल-अचल संपत्ति, बैंक खाते और एफडी की जानकारी जुटाई।शिक्षक ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपने बेटे, बेटी, उनकी शादी और उनके रहने की जगह की जानकारी भी दे दी। इसके अलावा बैंक में रखी एफडी, वाहन और अन्य संपत्ति की जानकारी भी ठगों को बता दी।
ठगों ने अगले दिन सुबह शिक्षक की कथित आईजी विक्रम सिंह से बात कराई। इसके बाद उन्हें एनआईए के कथित अधिकारी राकेश अग्रवाल से बात कराई गई। कथित एनआईए अधिकारी ने भी शिक्षक को बताया कि उनके नाम से मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज है और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। शिक्षक ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह कभी जम्मू-कश्मीर नहीं गए और वहां उनका कोई बैंक खाता भी नहीं है। इस पर कथित अधिकारी ने कहा कि उनका मामला विक्रम सिंह देख रहे हैं और उन्हें जैसा बताया जाए, वैसा ही करना होगा। इसके बाद विक्रम सिंह ने शिक्षक से कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी चल संपत्ति को आरटीजीएस के माध्यम से जमा करना पड़ेगा।
ठगों ने शिक्षक को बताया कि रकम जमा करने के बाद उन्हें एनआईए कोर्ट से नाॅट इन्वाल्वमेंट सर्टिफिकेट (एनआइसी) मिलेगा। इसके बाद रिजर्व बैंक आफ इंडिया उनकी संपत्ति की जांच करेगा और यह प्रमाणित करेगा कि उनकी रकम वैध है या नहीं। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से शिक्षक उनकी बातों में आ गए। 25 सितंबर को शिक्षक अपने बैंक की पंडरी शाखा पहुंचे और अपनी एफडी तुड़वाकर रकम अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कराई। अगले दिन लगातार बारिश के कारण वह बैंक देर से पहुंचे और आरटीजीएस नहीं कर पाए।
27 सितंबर को शिक्षक दोबारा बैंक पहुंचे। ठगों द्वारा बताए गए आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के खाते में उन्होंने अपने खाते से 18 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। एफआइआर में इस खाते को ''''JAMKA VALVE'''' नाम से दर्ज बताया गया है। रकम ट्रांसफर करने के बाद शिक्षक ने वाट्सएप पर ठगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ठगों ने रकम ट्रांसफर होने की पुष्टि के लिए बैंक की जमा पर्ची मांगी। शिक्षक ने पर्ची नहीं मिलने की बात कही तो उनसे पासबुक अपडेट कर उसकी फोटो भेजने को कहा गया। शिक्षक ने पासबुक अपडेट कर फोटो वाट्सएप पर भेज दी। उसी दिन शाम करीब साढ़े चार बजे ठगों ने शिक्षक को आरबीआई का कथित प्रमाणपत्र भी भेज दिया।