• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

G 20: छत्तीसगढ़ी व्‍यंजन के दीवाने हुए विदेशी मेहमान, लाल भाजी और चीला खाकर अतिथियों ने कहा- वाह छत्तीसगढ़

G 20 in Raipur: जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने आए विदेशी मेहमान छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं पर मुग्ध हो गए।

By Ashish Kumar GuptaEdited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Tue, 19 Sep 2023 08:49:17 AM (IST)Updated Date: Tue, 19 Sep 2023 08:49:17 AM (IST)
G 20: छत्तीसगढ़ी व्‍यंजन के दीवाने हुए विदेशी मेहमान, लाल भाजी और चीला खाकर अतिथियों ने कहा- वाह छत्तीसगढ़

HighLights

  1. मेफेयर में देर रात तक पंथी नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लिया आनंद
  2. विदेशी अतिथियों को पूरे छत्तीसगढ़ के वैभव और संस्कृति से कराया परिचय
  3. जंगल सफारी का दौरा करेंगे जी-20 सम्मेलन में शामिल होने आए विदेशी मेहमान

अजय रघुवंशी/रायपुर। G 20 in Raipur: जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने आए विदेशी मेहमान छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं पर मुग्ध हो गए। पंथी नृत्य से लेकर सुआ, करमा और बस्तरिया नृत्य का समां ऐसा बंधा कि मेफेयर रिसार्ट में रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों से उनकी नजरें हटी नहीं, साथ ही छत्तीसगढ़ी व्यंजन का स्वाद विदेशी अतिथियों को भा गया। वे वाह छत्तीसगढ़ बोलने से नहीं चूके।

छत्तीसगढ़ी पकवान लाल भाजी,चीला, चौसीला और जिमीकांदा की सब्जी उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आया। सोमवार को अतिथियों को कांसे की थाली में छोटी कुर्सी में बिठाकर विशेष छत्तीसगढ़ी व्यंजन परोसा गया। कार्यक्रम नवा रायपुर में हैं, लेकिन राज्य सरकार के माध्यम से यहां उन्हें पूरे छत्तीसगढ़ के वैभव और संस्कृति से परिचय कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें लोक परंपरा, छत्तीसगढ़ के इतिहास से लेकर सांस्कृतिक संपन्नता के बारे में बताया जा रहा है।


अमेरिका, दक्षिण कोरिया, चीन, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन आदि देशों के प्रतिनिधिमंडल को पुरखौती मुक्तांगन की सैर कराई गई। संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने उन्हें भ्रमण कराया। नवा रायपुर में जी-20 की बैठक के दौरान आर्थिक मुद्दों पर गंभीर चिंतन के साथ ही यहां छत्तीसगढ़ की सतरंगी छटा बिखर रही है। कार्यक्रम के समापन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) जनभागीदारी कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की मेजबानी करेगा।

छत्तीसगढ़ी पकवान में यह रहे शामिल

फरा, देहाती बड़ा, चौसीला, मूंग बड़ा, चावल चीला, लाल भाजी, जिमीकांदा की सब्जी, चौलाई भाजी, करेला चना, बड़ा कढ़ी, मसूर बटकर की सब्जी, बाजरे की रोटी, तवा फुल्का, गोविंद भोग चावल, मखना लाड़ू, तिखुर और मिलेट्स फिरनी।

हर्बल, माटीकला और मिलेट्स स्टाल में खरीदारी

मेफेयर होटल एंड रिसोर्ट में राज्य सरकार की ओर से हर्बल, हैंडलूम, माटीकला के उत्पाद और मिलेट्स के लिए अलग से स्टाल गया गया है। यहां प्रतिनिधिमंडल ने उत्पादों की विशेषताओं को समझा और फिर खरीदारी की।

नंदनवन और जंगल सफारी का दौरा आज

जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधियों को नंदनवन जूलाजिकल पार्क और एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित जंगल सफारी का दौरा भी कराया जाएगा। यहां समापन समारोह में ‘रात्रि भोज पर संवाद’ और एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होगा।

जी-20 वाटिका में पौधरोपण

बैठक के ऐतिहासिक क्षणों को यादगार बनाते हुए सेक्टर-24 में जी-20 वाटिका तैयार की गई है। यहां 65 विदेशी अतिथियों ने अलग-अलग पौधे लगाए। 1.2 हेक्टेयर में विकसित इस वाटिका में लैंडस्केपिंग के साथ ही आकर्षक साज-सज्जा और लाइटिंग की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने फाक्स टेल, मोलसारी, सीता, अशोक, कचनार, अफ्रीकन ट्यूलिप ट्री, पिंक पोई व ट्री आफ गोल्ड के पौधे लगाए। यह वाटिका एकात्म पथ के करीब ओवल शेप में तैयार किया गया है।

पुरखौती मुक्तांगन को कैमरे में किया कैद

विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने पुरखौती मुक्तांगन में लोकनृत्य, लोककला, आमचो गांव की प्रतिकृति को करीब से समझा। यहां उन्हें कई दृश्य कैमरे में कैद किए। विशेषज्ञों ने यहां सभी विषयों पर अंग्रेजी में विस्तार से जानकारी दी। मुक्तांगन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति को दर्शनीय अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।