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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 07, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gauri Gaura Puja In Raipur: तालाब की माटी से गौरी-गौरा की स्थापना, पूजन कर किया विसर्जन

Gauri Gaura Puja In Raipur: दीपावली की आधी रात से लेकर दूसरे दिन तक रायपुर में छाया रहा उल्लास।

By Kadir KhanEdited By: Kadir Khan
Publish Date: Sun, 07 Nov 2021 08:40:00 AM (IST)Updated Date: Sun, 07 Nov 2021 08:40:56 AM (IST)
Gauri Gaura Puja In Raipur: तालाब की माटी से गौरी-गौरा की स्थापना, पूजन कर किया विसर्जन

Gauri Gaura Puja In Raipur: रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दीपावली पर्व पर घर-घर में जहां शाम से लेकर रात तक महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना का दौर चला, वहीं रात बाद विविध मुहल्लों के चौक-चौराहों पर तालाब से लाई गई मिट्टी से गौरी-गौरा की प्रतिमा स्थापित की गई। गौरी-गौरा की प्रतिमा स्थापित करने के बाद रात भर पूजा-अर्चना की गई। गौरी-गौरा पूजा के दौरान नगाड़ा बाजा की धुन पर भक्ति नृत्य का दौर चलता रहा। अगले दिन सुबह से गौरी-गौरा प्रतिमा का विसर्जन करने का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें सभी वर्ग ने उत्‍साह से भाग लिया। य‍ह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।

सोंटा की मार सहने की परंपरा निभाई

गौरी-गौरा विसर्जन यात्रा के दौरान पुरुष अपने सिर पर गौरी-गौरा की प्रतिमा उठाकर चल रहे थे। पीछे-पीछे श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए भक्तिभाव से शामिल हुए। कई विसर्जन यात्रा में कांस के फूल, पत्तों से बनाए गए सोंटा यानी कोड़ा से अपने शरीर और हाथों पर स्वयं मार खाई। सोंटा मारते चल रहे लोगों के साथ उनके सहयोगी सोंटा की मार खाने वाले के शरीर पर गौरी-गौरा प्रतिमा के समक्ष प्रज्वलित जोत का तेल लगाकर पीड़ा को शांत कर रहे थे। पुरानी बस्ती के अनेक इलाकों में यह परंपरा निभाई गई। इसे देखने के लिए सड़क किनारे लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।


तालाब में किया विसर्जन

लाखेनगर, अश्विनी नगर, ब्रह्मपुरी, कुशालपुर, बंधवापारा समेत अनेक मुहल्लों के गौरी-गौरा चौक से विसर्जन यात्रा निकलकर आसपास के तालाबों में पहुंची। विधिवत पूजा-आरती करके प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। यह नजारा बूढ़ातालाब, मलसाय तालाब, बंधवा तालाब, आमा तालाब समेत अनेक तालाबों के किनारे दिखाई दिया।