
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ का औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पिछले तीन वर्षों में राज्य को नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। कई बड़ी परियोजनाओं पर काम भी शुरू हो चुका है, जिनसे पौने दो लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। राज्य अब सिर्फ कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहा है।
राज्य सरकार औद्योगिक आधार में विविधता लाने के लिए आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी जैसे भविष्य से जुड़े क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही है। औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 के तहत ग्रीन स्टील, आईटी और एआई, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
प्रदेश में करीब 1100 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर परियोजना पर काम चल रहा है। नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब बनाने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।
छत्तीसगढ़ मध्य भारत का महत्वपूर्ण औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र बनता जा रहा है। प्रदेश में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं चल रही हैं। मजबूत रेल नेटवर्क से परिवहन लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा, ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रायपुर के उरला और सिलतरा, भिलाई-दुर्ग के बोरई, बिलासपुर के सिरगिट्टी और कोरबा राज्य के प्रमुख औद्योगिक और खनिज केंद्र हैं। राज्य के कुल उद्यमों में लगभग 71 प्रतिशत से अधिक सेवा क्षेत्र में आते हैं। बड़ी संख्या में लोग इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम, बिजली उत्पादन और खनन आधारित उद्योगों में काम कर रहे हैं।
एक नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना था। तब से इसकी पहचान खनिज संपदा और कोर सेक्टर से जुड़ी रही है। बीते 26 वर्षों में राज्य ने पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ एआई, डेटा सेंटर, गारमेंट्स और वनोपज उद्योगों की ओर भी कदम बढ़ाए हैं।
राज्य में 44 प्रतिशत से अधिक भू-भाग वनाच्छादित है। इमली, महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा और औषधीय संसाधनों का प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन वनांचल में रोजगार और उद्योग के अवसर बढ़ा सकता है। इससे स्थानीय और जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नवा रायपुर में राज्य की पहली कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है। इसमें 152.74 करोड़ रुपये का निवेश होगा और करीब 3,500 युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड में 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है, जिससे 3,500 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा।
ग्रीन स्टील क्षेत्र में 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से 10,921 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। सिंगापुर प्रवास के दौरान डेटा सेंटर, कौशल विकास और हरित परियोजनाओं के लिए एमओयू हुए हैं। 41,750 करोड़ रुपये के एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस जैसे निवेश प्रस्तावों पर भी सहमति बनी है।
राज्य में उद्योगों का सफर काफी लंबा रहा है। 1960 से पहले राज्य में बड़े और मध्यम उद्योगों की संख्या सिर्फ चार थी। 1990 से 2000 तक यह संख्या बढ़कर 165 हो गई। वर्तमान में प्रदेश में 80,000 एमएसएमई इकाइयां और 98,256 से अधिक बड़े व मध्यम आकार की औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के तहत 1,983 उद्योग पंजीकृत हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या 4,61,454 है।
1896 में राजनांदगांव में बंगाल नागपुर कॉटन मिल स्थापित हुई थी। 1935 में रायगढ़ में जूट मिल शुरू हुई। भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना दो फरवरी 1955 को भारत और तत्कालीन सोवियत संघ के समझौते के तहत हुई थी। 1965 में बिलासपुर कोरबा में बालको एल्युमीनियम संयंत्र और 1967-68 में रायपुर में रेलवे वैगन वर्कशॉप शुरू हुई थी।
नई औद्योगिक नीति से प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। निवेश भी बढ़ रहा है।
-लखनलाल देवांगन, उद्योगमंत्री, छत्तीसगढ़