
रायपुर Ghasidas Museum in Raipur । छत्तीसगढ़ के राजाओं की रियासत और सियासत से जुड़े दुर्लभ अभिलेख अब भी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय में मौजूद हैं। यहां देश का सबसे पुराना काष्ठ स्तंभ लेख भी रखा गया है, जो दूसरी सदी ईसवी का है। इस अभिलेख को बिलासपुर जिले के किरारी गांव के हीराबांधा तालाब से प्राप्त किया गया है। ब्राम्ही लिपि में लिखे इस अभिलेख में शासकीय अधिकारियों के नाम और पदनाम का उल्लेख है। पुरातत्ववेत्ता बताते हैं कि यह काष्ठ स्तंभ सातवाहन शासक के हैं, जिसके अभिलेख हिंदुस्तान में एकमात्र दुर्लभ पुरावशेष हैं।
देश के सबसे पुराने संग्रहालय में से एक घासीदास संग्रहालय में प्रथम सदी इसवीं से लेकर 15 वीं सदी इसवीं तक के दुर्लभ अभिलेख मौजूद हैं। ये अपने युग के दस्तावेजी प्रमाण हैं, जो तत्कालीन घटनाओं, निर्माण संबंधी जानकारी के साथ-साथ प्राचीन परंपरा और संस्कृति पर प्रकाश डालता है। संग्रहालय में आरंग, सिरपुर, मल्हार, कोसगई, भोरमदेव, खल्लारी और रतनपुर आदि स्थानों से प्राप्त शरभपुरीय, सोमवंशी और कलचुरी समेत अनेक शासकों के अभिलेख हैं।
1921 में बिलासपुर से मिला
इतिहासकार रामेंद्र नाथ मिश्र बताते हैं कि यह देश का सबसे पुराना काष्ठ स्तंभ लेख है। यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। 1921 में इसकी बिलासपुर जिले के किरारी गांव के तालाब से प्राप्त हुआ है, जिसे डॉ.हीरानंद शास्त्री ने प्रमाणित किया। इसका वास्तविक लेख 320 सेमी ऊंचा था जो अब 112 सेमी बचा है।
वे बताते हैं कि बाबूलाल प्यारेलाल गुप्ता की किताब के मुताबिक ब्राम्ही लिपि में लिखे इस लेख में सदियों पुराने, सेनापति, नगररक्षक और गणक जैसे लोगों के पद नाम उल्लेखित हैं। इन पदाधिकारियों के नाम एक साथ एक काष्ठ लेख में लिखे होने से ये अनुमान लगाया जा सकता है कि स्तंभ किसी बड़े समारोह के लिए लगाया गया होगा और कार्यक्रम का राजा भी मामूली नहीं होगा।
हटकेश्वर महादेव मंदिर का भी उल्लेख
संग्रहालय की रौशनी शर्मा बताती हैं कि 1458 ईसवी में कल्चुरि शासक ब्रम्हदेव के राज्यकाल के भी अभिलेख मौजूद हैं, जिसे रायपुर के पुराने किले से प्राप्त किया गया था। इसमें कल्चुरि शासक ब्रम्हदेव के उनके नायक हाजिराज ने रायपुर में खारुन नदी के किनारे हटकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया था। उसके सबूत इस अभिलेख से मिलते हैं, जो नागरी लिपि में लिखे गए हैं।