रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जैन समाज के 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाओं वाले कैवल्यधाम परिसर में बालिकाओं को धार्मिक एवं पारिवारिक संस्कारों की शिक्षा दी जा रही है। शिविर की खासियत यह है कि बालिकाएं 24 घंटे वहीं रहकर सुबह से रात तक विविध सत्रों में ज्ञान प्राप्त कर रही हैं। माता-पिता को भी बालिकाओं से मिलने की अनुमति नहीं है। मोबाइल का उपयोग भी नहीं किया जा रहा।
साध्वी स्नेहयशा श्रीजी के सानिध्य में आयोजित शिविर का उद्देश्य अच्छे संस्कार का बीजारोपण करना है, ताकि आने वाले समय में अच्छी श्राविका का संस्कार उदित हो। शिविर में मंदिर पूजन, दर्शन विधि, सूत्र उच्चारण, भगवान महावीर के संदेशों और जैन शास्त्रों को पढ़ाया जा रहा है। धर्म के साथ ही शिविर में संस्कार, जीने की कला, व्यावहारिक शिक्षा भी दी जा रही है। इसमें छत्तीसगढ़ के अलावा गुजरात, बंगाल, मुंबई, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश जैसे सात राज्यों की 350 बालिकाएं शामिल हैं।
सबसे पहले दर्शन-पूजन
शिविर में दिनचर्या सुबह 4.30 बजे शुरू होकर रात नौ बजे तक चलती है। सुबह ढोल नगाड़ों के साथ बालिकाओं को उठाया जाता है। गुरु भगवंतों के साथ सभी 24 तीर्थंकरों के दर्शन और पूजा कर नवाणु यात्रा करते हैं। गुरुजनों के बाद दोपहर से अलग-अलग तरह की कक्षाएं होती हैं। शाम को धर्म, संस्कार, कर्म से संबंधित खेल भी खिलवाए जाते हैं, ताकि बच्चों को खेल-खेल में धर्म, संस्कार का ज्ञान हो। शाम 6.30 से पहले भोजन कर लिया जाता है और नौ बजे तक बालिकाएं सो जाती हैं।
व्यवहार पर हर घंटे मिल रहे नंबर
संयोजक पंकज चोपड़ा ने बताया कि बालिकाओं में त्याग की भावना जागृत हो, इसके लिए अलग-अलग व्यवहार पर हर घंटे के हिसाब से नंबर दिए जाते हैं। गरम पानी पीने पर, शांति से भोजन करने पर, रोज पूजा करने पर, खाने के बाद बर्तन धोकर उसके पानी को पीने पर, समायिक करने पर, बिना चप्पल रहने पर, बिना कूलर-पंखे के सोने पर, दोस्ती और अच्छे विचारों पर नंबर देते हैं। सबसे ज्यादा नंबर हासिल करने वाली 10 बालिकाओं को सम्मानित किया जाएगा।
धर्म पर 75 और जीने की कला पर 30 क्लास
पंकज चोपड़ा, सह संयोजक नितिन बरमेचा, पंकज भंसाली, अंजली चोपड़ा, योगिता लोढ़ा, उमेश पारख, सपना जैन, दिवस चोपड़ा, उमेश लोढ़ा, रश्मि लूणावत, कृतिका सराफ व्यावहारिक शिक्षा के साथ सेवा दे रहे हैं। डा. जसवंत जैन रोजाना दो बार बालिकाओं को देखने आते हैं। एक नर्स 24 घंटे रहती है। 15 दिनों में धर्म की 30 क्लास, संस्कार पर 30 क्लास और 30 क्लास जीने की कला व व्यावहारिक शिक्षा की होंगी। इनमें सेल्फ अवेयरनेस, सायबर सिक्योरिटी, टाइम मैनेजमेंट, पाजिटिव एटीट्यूट, परिवार का महत्व, कुकिंग, मैनेजमेंट, माइंड एंड स्ट्रेस मैनेजमेंट, गोल मैनेजमेंट, प्रभावी भाषण कला, मनी मैनेजमेंट, आर्ट एंड क्राफ्ट, जनरेशन गैप, कैसे बात करना चाहिए, डिसीजन मेकिंग की शिक्षा दी जा रही है।