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जशपुर से बस्तर तक कंटेंट क्रिएटर्स का कमाल, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को 40 देशों तक पहुंचाया, भाषा बनी डिजिटल ताकत

Hindi Diwas 2026 Special: हिंदी दिवस पर छत्तीसगढ़ के पांच कंटेंट क्रिएटर्स की कहानी प्रेरणादायक है।

By Akhil Kumar SharmaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 12:47:45 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 12:47:45 PM (IST)
जशपुर से बस्तर तक कंटेंट क्रिएटर्स का कमाल, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को 40 देशों तक पहुंचाया, भाषा बनी डिजिटल ताकत
हिंदी दिवस पर छत्तीसगढ़ के 5 कंटेट क्रिएटर्स

HighLights

  1. हिंदी दिवस पर 5 छत्तीसगढ़ी क्रिएटर्स की प्रेरक यात्रा
  2. दीपक आपट की संस्कृति यात्रा 40 देशों तक पहुंची
  3. गरिमा तिवारी ने दादी-नानी के व्यंजनों को दिया मंच

अखिल शर्मा, नईदुनिया, रायपुर। हिंदी दिवस पर भाषा की बदलती दुनिया को समझने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय इन कंटेंट क्रिएटरों की जर्नी खास है। किसी ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति को 40 देशों तक पहुंचाया, किसी ने प्रदेश की पहचान को डिजिटल मंच दिया, तो किसी ने बस्तर की अनकही कहानियों और पर्यटन के अनछुए रंगों को अपनी भाषा में दुनिया के सामने रखा।

छत्तीसगढ़ के ये क्रिएटर्स हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा को ही अपनी ताकत बना रहे हैं और अपनी जड़ों से जुड़े कंटेंट के जरिए वैश्विक पहचान बना रहे हैं।

दीपक आपट: 40 देशों तक पहुंची छत्तीसगढ़ की संस्कृति

जशपुर के कोतबा निवासी दीपक आपट का सपना अभिनेता बनने का था। ‘सावधान इंडिया’ में काम करने के बाद वे कंटेंट क्रिएशन से जुड़े और 2017 में शुरू हुआ सफर अब 40 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है।

गांव की आदिवासी संस्कृति से शुरू हुआ उनका काम दुनिया की विभिन्न जनजातियों की जीवनशैली और परंपराओं तक पहुंचा। वे छत्तीसगढ़ की प्रकृति, संस्कृति और लोकजीवन को भी दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। उनके वीडियो देखकर विदेशों से पर्यटक जशपुर पहुंचे और यहां की संस्कृति को जाना। इंस्टाग्राम पर उनके 1.70 लाख से अधिक फालोअर्स हैं। दीपक की कहानी बताती है कि कैसे स्थानीय संस्कृति को वैश्विक मंच मिल सकता है।


मिनेंद्र चंद्राकर: सवाल था - दुनिया छत्तीसगढ़ को जानती क्यों नहीं

दुर्ग के मिनेंद्र चंद्राकर ने 2017 में ‘लोग हमारे छत्तीसगढ़ को जानते क्यों नहीं?’ सवाल के साथ डिजिटल यात्रा शुरू की। भोपाल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने प्रदेश की भाषा, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं की कम डिजिटल मौजूदगी महसूस की।

इसी सोच से उन्होंने ‘मोर भुइयां छत्तीसगढ़’ शुरू किया, जिसने छत्तीसगढ़ी मीम, हास्य और जानकारीपूर्ण कंटेंट के जरिए युवाओं को संस्कृति से जोड़ने का काम किया। अमेरिका और यूएई में रहने वाले छत्तीसगढ़िया भी इससे जुड़े हैं। बाद में दुर्ग, भिलाई और रायपुर के लिए उन्होंने ‘डी फार दुर्ग’ शुरू किया। इंस्टाग्राम पर 83.2 हजार फालोअर्स हैं। मिनेंद्र का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पहचान को डिजिटल दुनिया में मजबूत करना था।

गरिमा तिवारी: दादी-नानी की रसोई से छत्तीसगढ़ का स्वाद दुनिया तक

पेशे से विधि क्षेत्र से जुड़ी गरिमा तिवारी वर्ष 2016 से ‘नानी कुक्स’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ के खान-पान और संस्कृति को दस्तावेज का रूप दे रही हैं। इसकी शुरुआत घर की रसोई, दादी-नानी की यादों और पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक व्यंजनों से हुई।

अब उनका काम छत्तीसगढ़ी भोजन को राष्ट्रीय स्तर की चर्चाओं तक पहुंचा रहा है। पिछले पांच वर्षों में गरिमा ने प्रतिष्ठित प्रकाशनों और किताबों के लिए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों पर काम किया है। उन्हें फेमिना पत्रिका में छत्तीसगढ़ी भोजन की संरक्षक के रूप में भी जगह मिली। उनका काम लगातार पांच वर्षों से गोदरेज की खाद्य प्रवृत्ति रिपोर्ट का हिस्सा रहा है। हाल ही में उन्होंने बस्तर की चपड़ा चटनी को चटनियों के संकलन में दर्ज किया। गरिमा के लिए यह सिर्फ व्यंजनों का संग्रह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की स्मृतियों, मौसम, त्योहारों और घरेलू परंपराओं का दस्तावेज है।

रेणुका सिंह: बस्तर की कहानियों को दी आवाज

रेणुका सिंह ने पत्रकारिता से सफर शुरू किया। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान बस्तर के ग्रामीण जीवन पर लिखा। 2019 में बस्तर लौटकर उन्होंने ‘बस्तर विलेजर्स’ के जरिए अनकही कहानियां सामने लाईं। दूरदर्शन के साथ काम कर चुकीं रेणुका अब तक 1,000 से अधिक कहानियां लोगों तक पहुंचा चुकी हैं। इंस्टाग्राम पर 58 हजार से अधिक फालोअर्स हैं। रेणुका बस्तर के गांव, वहां के लोग और उनकी संस्कृति को अपनी कहानियों में दिखाती हैं।

आकाश साहू: कैमरे से खोज रहे छत्तीसगढ़ के अनछुए रंग

ट्रैवल फिल्ममेकर और सांस्कृतिक कहानीकार आकाश साहू ने 2023 में ‘आकाश का सफर’ शुरू किया। वे छत्तीसगढ़ के अनछुए पर्यटन स्थलों, जनजातीय संस्कृति और विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। बस्तर दशहरा, जशपुर और दंतेवाड़ा पर विशेष सीरीज बनाई। 2025 में पर्यटन मंडल से बेस्ट ट्रैवल इन्फ्लुएंसर अवार्ड मिला। आकाश अपने कैमरे से छत्तीसगढ़ के उन रंगों को दिखा रहे हैं, जो अब तक अनदेखे थे।