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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 23, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Raipur Column Anderkhane: नरवा-गरुवा को छोडूंगा नहीं, योजना को किसी भी तरह पूरा करना है- बघेल

Raipur Column Anderkhane: कलेक्टरों के बीच चर्चा सरकार बन रही बाबा रामदेव और ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चा पर मृगेंद्र पांडेय ने चुटकी ली।

By Shashank.bajpaiEdited By: Shashank.bajpai
Publish Date: Sat, 23 Oct 2021 09:30:00 AM (IST)Updated Date: Sat, 23 Oct 2021 09:30:51 AM (IST)
Raipur Column Anderkhane: नरवा-गरुवा को छोडूंगा नहीं, योजना को किसी भी तरह पूरा करना है- बघेल

मृगेंद्र पांडेय, रायपुर। Raipur Column Anderkhane: मुख्यमंत्री ने दो दिन में कलेक्टर और एसपी की क्लास ली। उनके कामकाज की समीक्षा की। कलेक्टरों ने मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नरवा-गरुवा में आ रही दिक्कतों पर करीब आधे घंटे चर्चा की। कलेक्टरों ने कहा कि कमिशन कम मिलने के कारण कई प्रोडक्ट खराब हो जा रहे हैं। किसी ने कहा कि खाद डंप हो रही है, बिक्री के लिए ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।

कलेक्टरों के तरह-तरह के बहाने सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आप कितना भी दर्द बता दें, मैं इस योजना को छोड़ने वाला नहीं हूं। इस योजना को किसी भी कीमत पर पूरा करना है। बेहतर से बेहतर काम करके आप खुद को साबित करें। हालांकि आठ घंटे की मैराथन बैठक में कई कलेक्टरों के माथे पर पसीना भी आ गया। मुख्यमंत्री ने जब यह कहा कि काम तो सबको करना होगा, बहाने बनाने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।


सरकार बन जाएगी बाबा रामदेव

कलेक्टर कांफ्रेंस के बाद एक कलेक्टर के कहा कि आने वाले समय में सरकार बाबा रामदेव बन जाएगी। कलेक्टर साहब ने बताया कि सरकार ने गोठान को मल्टीयूटिलिटी सेंटर के रूप में विकसित करने का टार्गेट दे दिया। इसमें गोबर के दीए से लेकर तिखूर के लड्डू तक बनेंगे। अगर सही से योजना को धरातल पर उतार दिया जाए तो बाबा रामदेव को भी पीछे छोड़ देंगे। सरकारी विभाग में इनकी खरीदी करनी ही है।

अगर सरकार किसी प्राइवेट मार्केटिंग कंपनी को अपने प्रोडक्ट बेच दे तो न सिर्फ मुनाफा होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी कंपनी बनने में देर नहीं लगेगी। हालांकि, कुछ युवा कलेक्टर इस योजना में खास रुचि नहीं ले रहे हैं। अपने जिले में बेहतर परफार्मेंस देने वाले एक कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इसे लेकर सख्ती तो दिखाई, लेकिन पहचान करके कलेक्टरों को टाइट किया गया होता तो आने वाले समय में बेहतर परिणाम मिलता।

अघोषित डिप्टी सीएम

एक मंत्री को ब्यूरोक्रेसी में अघोषित सीएम बताया जा रहा है। कलेक्टर और एसपी की कांफ्रेंस में मंत्रीजी मुख्यमंत्री के बगल में बैठे रहे। एक वरिष्ठ आइपीएस ने कहा कि कलेक्टरों की बैठक में नरवा-गरुवा पर चर्चा होनी थी। ऐसे में मंत्रीजी की मौजूदगी समझ में आती है, लेकिन पुलिस की बैठक में वो बैठे थे। एसपी कांफ्रेंस के बाद बाहर निकले एक अधिकारी ने कहा कि मंत्रीजी के मंच पर बैठने से साफ हो गया है कि वर्तमान परिस्थिति में उनकी हैसियत सरकार में नंबर दो की हो गई है।

इससे पहले भी मंत्रीजी अपने बयान से लगातार नंबर दो होने का भान कराते रहे हैं। सरकार जब किसी मुद्दे पर घिरती है तो मंत्रीजी मोर्चा संभालते हैं। मीडिया से लेकर विधायकों तक अपने राजनीतिक कौशल का इस्तेमाल करके संकट मोचक की भूमिका में थे। ढाई-ढाई साल के फार्मूले में भी मंत्रीजी की सक्रियता की चर्चा हर तरफ हो रही थी।

राष्ट्रीय फलक पर आदिवासी संस्कृति

राज्य में सरकार आदिवासी महोत्सव कराने जा रही है। सभी प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को न्यौता दिया गया है। विधायक और संसदीय सचिवों को आमंत्रित करने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दरअसल, सरकार की कोशिश है कि छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय फलक पर एक पहचान दी जाए। कोरोन काल के कारण दो साल तक महोत्सव नहीं हो पाया था।

सरकार अब राज्योत्सव के स्थान पर आदिवासी महोत्सव करके नई पहचान स्थापित करने की कोशिश कर रही है। राज्योत्सव पिछले 20 साल से मनाया जा रहा है। इस दौरान 15 साल तक भाजपा की सरकार थी। अब सरकार आदिवासी महोत्सव कराकर आदिवासी समाज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। नार्थ इस्ट से लेकर देश के कोने-कोने के कलाकार आएंगे। अपने प्रदेश की संस्कृति की जानकारी देंगे। सरकार की इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।