Independence day 2020 wishes in Chhattisgarhi: देशवासी मन ए बार 15 अगस्त कर तारीख ला हमर देश के 74वां स्वतंत्रता दिवस कर रूप में मनाहीं। ए ओहिच दिन हवय जेखर बर हमर वीर शहीद मन अपन कुर्बानी देहे रहिन। ए बार कोरोना संक्ररमन कर चलते सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हो पात हे, लेकिन लोगन के मन मा देशभक्ति के उत्साह ओइसनेच बने हुए हे। कश्मीर ले कन्याकुमारी अउ मुंबई ले कोलकाता तक हमन सब एक साथ मिलकर ए बार वायरस ले लड़त हन अउ एही बात हमर अनेकता में एकता ला दर्शाथे। जब भी हमर देश अउ लोगन पर संकट आए हे, हमन एक साथ मिलकर ओखर मुकाबला करे हन, ए समय भी वहिच समय हे। तो ए बार हमन भले ही एक-दूसर से नहीं मिल सकबो, लेकिन अपन दिल में बसे देशभक्ति के ए संदेशा सभी ला स्वतंत्रता दिवस कर शुभकामना कर साथ देहथ हन...

मोर देश

किसम-किसम के भाखा-बोली

कतका सुघ्घर हे हांसी-ठिठोली

अउ हावय कई ठिन भेष रे संगी

अइसन हे मोर देश रे संगी

अइसन हे मोर देश..

नदिया-नरवा जिंहां परवत-घाटी

हरियर खेती हावय सोनहा माटी

अउ सबले अलगे परिवेश रे संगी

अइसन हे मोर देश रे संगीगी

अइसन हे मोर देश..

देवी-देवता के आयन मनइया

पंथी-जसगीत के हमन गवइया

कहूं ल मारन नही ठेंस रे संगी

अइसन हे मोर देश रे सँगी

अइसन हे मोर देश..

हमर संस्कीरिति सब ला भाथे

बड़ मानथन जब पहुना आथे

कोनो नइ करय कलेष रे संगी

अइसन हे मोर देश रे संगी

अइसन हे मोर देश..

कासमीर अउ कन्याकुमारी हे

भुइयाँ के भीतर मिलथे नारी हे

देथें साधु-संत उपदेश रे संगी

अइसन हे मोर देश रे संगी

अइसन हे मोर देश..

मथुरा-काशी के तीरथ धाम हे

तिरुपति-शिरडी कतको नाम हे

इंहें ब्रम्हा-बिश्नु अउ महेश रे संगी

अइसन हे मोर देश रे संगी

अइसन हे मोर देश..

- शशिभूषण स्नेही, बिलाईगढ़

मोर भारत महान

झन पूछौ जमाना ले, का हमर कहानी हे।

हमार पहचान तो बस एतनेच हे कि हमन सब हिंदुस्तानी हें।

देहतहन सलामी ए तिरंगा ला

जेखर में हमर शान हे

सर ऊंचा रखबो एखर

जब तक हमर अंदर जान हे

दिल हमर एक हे अउ एक हमर जान,

हिंदुस्तान हमर हे हम एकर शान,

जान लुटा देबो देश पर हो जाबो कुर्बान,

एहिच बर हमन कथन- मोर भारत महान।

जम्मो देशवासी मन ला स्वतंत्रता दिवस के बधई।

- शरद सिंह, अम्बिकापुर

सुन रे पाकिस्तान

सुन रे पाकिस्तान

थोक बहुत बांचे होही तोर ईमान

कतको समझाय ले नई माने बईमान।।

कुकुर के पुछी हरे पाकिस्तान

पड़ोसी होके पड़ोसी के धरम कभू नई निभाय।।

हमर बर गड्ढा खने अपने ह झपाय

रही रही के करत रथे गोला बारी।।

अपने हरे चोर अउ हमर करथे चारी

आतंकवादी मनला दमांद कस खवाथस पियाथस।।

अउ भीख मांगे बर कटोरा धर के चीन अउ अमरीका डाहर जाथस

कभू करे घुसपैठ कभू करे सिजफायर।।

कभू नई चेते रे पाकिस्तानी कायर

निर्दोष जनता अउ जवान उपर गोली चलाथस।।

लड़े बर तो सकस नहीं पीठ देखा के भाग जाथस

सहत भर ले सहत हन जुहर मनमानी।।

जब हमन भिड़बो त निपट जाहू रे पाकिस्तानी

बहुत होगे तुहर गोला बारी अउ बम।।

फेर झन भूला बाप हरन तोर हम।

- लीला राम साहू, देवगांव फिंगेश्वर

बड़ मयारू मोर महतारी

सरग हे एखर एड़ी के धोवन

चारों मुड़ा हे शोर जी

बड़ मयारू मोर महतारी, अइसन धरती मोर जी

अरपा, पैरी, महानदी जस, गंगा धार बोहावत हे

वीर नारायण कस बेटा बर, दाई गोहार लगावत हे

सुंदरलाल- खूबचंद जस बलिदानी ल

दुलारिस अचरा के छोर जी

बड़ मयारू मोर महतारी, अइसन धरती मोर जी

छत्तीसगढ़ कोशल कहलाथे, छत्तीसगढ़ महतारी जी

सुम्मत के रद्दा मा चलथे, इंहा के सब नर नारी जी

सरन परे ला सम्बल देथे, बांधे मया के डोर जी

बड़ मयारू मोर महतारी, अइसन धरती मोर जी

बाल्मिकी- शबरी के कुटिया, भक्ति के जोत जलाथे जी

जात-पात के भेद नई हे, मया संदेश सुनाथे जी

अंधियारी अब छंटगे संगी, जुग- जुग ले लागे अंजोर

बड़ मयारू मोर महतारी, अइसन धरती मोर जी

- दिलीप टिकरिहा, पिरदा, बेमेतरा

भारत माँ संग प्यार करो

असान नइ रिहिस अजादी

सबझन लहू बोहाये हे

जेंन आज देस के संग नही

तेन ल पाकिस्तान बियाए हे

अजाद हवा नइ असान रिहिस

फेर बेड़ी घलो नई शान रिहिस

जेंन करना है तेन यार करो

फेर भारत माँ संग प्यार करो

- मयंक चतुर्वेदी मानस, रायपुर

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देशहित जीबो संगी

देशहित जीबो संगी,संगवारी जुरमिल

देशहित त्याग देबो अपन परान जी

अंचरा म भारती के आंच झन आय कभू

सुरता भुलाहु झन रखे रिहु ध्यान जी

बैरी देशद्रोही मन थर थर कांप जाय

लहू म उबाल सदा रखहु ईमान जी

लहर लहर तीन रंग के तिरंगा उड़े

चूमत अगास रहे इही अरमान जी!!

- सुनिल शर्मा "नील", थान खम्हरिया

गांधी के गोहार

गांधी पारै गोहार-गांधी पारै गोहार, हिंदू मुसलमां - माना रे।।

भाई के बेवहार-भाई के बेवहार, दूनों बरोबर जाना रे।। गांधी...।।१।।

भारत माता के दूनों बेटा। लड़ लड़ के झन काम ला मेंटा।।

लटपट देश सुतंत्र भये है। अड़बड़ दुख ला गांधी सहे हे।।

जुर मिल के अब जीया जुड़ावा, चैन की बंसी बजाना रे। गांधी पारै..।।२।।

विपत ऊपर विपत झेलिस।

हमरेच खातिर सब ला पेलिस।। एक करेबर जीव गांवाइस। जीयत भर सबला जुड़वाइस।। तौनों ला बैरी गोली मा मारिस। तेला का गोठियाना रे।। गांधी पारै।।३।।

जात पात के भेद ला टारी। ओखर काम ला रखिहा जारी।। सुन के सरग मां होही सुखारी। जम्मोच भिड़जावा एक्के दारी।। तबभेच गांधी ला घर-घर पाबो, अतके ला पक्का जाना रे।। गांधी पारै।।४।।

- पंडित द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र

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सुराज के गम्मत गीत

भैया भैया सुराज अब तो दसा ला सुधारा रे।।१।।

गोरा के राज जबर दुख पाएन। जम्मोच डहर ठगातेज आएन।। धन और धर्म दुनों ला गांवाएन। ठल्लक राज ला आखिर पाएन।। कइसे रहेन अउ कइसे भएन अब-

देख अउ आंखी उघारा रे।। भैया भाइगे०।।२।।

किसिम किसिम दुख पाएं संगी। खाये पिये के अड़बड़ तंगी।। चारों डहर ले होथे लफंगी। अब झन करिहा थोरको ढिलंगी।। देश के डोंगा परे भवसागर-

डूबय जन मंझदार रे।। भैया भइगे०।।३।।

गांवन गांव मा मेल करावा। सहर ले सुंदर सोर लगावा।। देस-विदेस के गोठ सुनावा। परजा के राज ला परजा सम्हारे--

बिनती 'विप्र' हमार रे।। भैया भइगे ।।४।।

- पंडित द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र

मोर महतारी

आजादी के तिहार मानबो

जम्मो बहिनी मिल के गाबो

जन गण मन अपनाबो,

तिरंगा धर के जाबो,

सहीद भाई के गुन गाबो,

भारत माँ के लाज बचाबो।

आजादी के तिहार मानबो,

जम्मो झि मिलके गाबो।

छत्तीसगढ महतारी के मान बढाबो,

वीरनारायण सिंग,ठा. प्यारेलाल,

खूबचन्द बघेल कस क्रांतिकारी,

लोगन मन के इहां किस्सा सुनाबो।

आजादी के तिहार मानबो,

जम्मो झि मिलके गाबो।

सहकारी आंदोलन सन्धि जुग अउ,

छत्तीसगढ़ सम्मान के सुरता कराबो,

लोगन मन ल अत्याचार ले बचाए ख़ातिर,

सहीद वीरनारायण के समर्पण बताबो।

आजादी के तिहार मानबो,

जम्मो झि मिलके गाबो।

भारत मे हमन झंडा फहराबो,

हमर भाखा के महत्तम बताबो,

छत्तीसगढ़ी म पढ़ाई करवाबो,

हिमालय कस खड़े हो जाबो।

आजादी के तिहार मानबो,

जम्मो झि मिलके गाबो।

आँखी झन देखा रे बिदेशी,

तोर आँखी के भरता बनाबो,

छत्तीसगढ़िया हन छत्तीसगड़ी गीत गाबो,

तुंहला तुंहर गांव के रद्दा देखाबो।

आजादी के तिहार मानबो,

जम्मो झि मिलके गाबो।

- निर्मला ध्रुव, बिलासपुर

धरती के रखवार चाही जी

मोला सुनता अउ सुमत ले सुबिचार चाही जी।

ए माटी के जतन करैया, ए समाज ला बने गढ़ैया।

धरती के रखवार चाही जी, माटी के रखवार चाही जी

पुरखा के बटोरे सबो संस्कृति के मान लावय

छरियाये माटी ला गढ़ के सुघ्घर पहिचान लावय

पबरित माटी ला जनावै फेर जग मा धान कटोरा

ए धरती मा के महिमा गावै बइठार के आरुग चौरा

मोला अइसन मीत मितवा हितवार चाही जी

ए माटी के जतन करैया, ए समाज ला बने गढ़ैया।

धरती के रखवार चाही जी, माटी के रखवार चाही जी

राजनीती राजधरम ला नित नित नियाव मा धारय

भ्रष्टाचारी काला धन ला जर ले उखान बिदारय

देश के सेवा परहित जिनगी के सांस खपत ले

देश ला संवार के जाहूं अंतस ले इहि सपथ लय

मोला अइसन राज परजा सरकार चाही जी

ए माटी के जतन करैया, ए समाज ला बने गढ़ैया।

धरती के रखवार चाही जी, माटी के रखवार चाही जी

पाँव कांटा गड़ही तभो ले बिपदा ला राउंडत रेंगय

अंड़े राहय सत मारग मा बने गिनहा सौहत देखय

धरम अउ करम ला मानय पुरसारथ करय करावै

दाई ददा सत सियान के मान करके गरब ला पावै

मोला अइसन बेटी बेटा परिवार चाही जी

ए माटी के जतन करैया, ए समाज ला बने गढ़ैया।

धरती के रखवार चाही जी, माटी के रखवार चाही जी

- ईश्वर साहू बंधी, बिलासपुर

Updating......

Posted By: Himanshu Sharma

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